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इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पर भारत सरकार के विद्युत सचिव से बिजली कर्मचारी संगठनों की 12 जनवरी को वार्ता

लाइव सत्यकाम न्यूज,लखनऊ : इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के ड्राफ्ट पर बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संगठनों की 12 जनवरी को केन्द्रीय विद्युत सचिव श्री पंकज अग्रवाल से वार्ता होगी। वार्ता के बाद इस विवादित बिल पर केन्द्र सरकार का रुख देखते हुए बिजली कर्मचारियों के राष्ट्रीय फेडरेशन विचार विमर्श कर आगे की रणनीति का ऐलान करेंगे।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि पहले यह मीटिंग श्रम शक्ति भवन के कांफ्रेंस हाल में हाइब्रिड मोड में होनी थी जिसका तात्पर्य यह होता है कि बिजली कर्मियों और अभियंताओं के प्रमुख पदाधिकारी श्रम शक्ति भवन में जाकर मीटिंग अटेंड करते और देश के विभिन्न प्रान्तों से इंजीनियरों और बिजली कर्मचारियों के प्रांतीय पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मीटिंग में सम्मिलित होते। किन्तु भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने एक दिन पहले मीटिंग की व्यवस्था में परिवर्तन कर दिया है और अब कर्मचारियों और इंजीनियरों के संगठनों के सभी पदाधिकारियों को केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मीटिंग ज्वाइन कर अपना पक्ष रखना होगा।
शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के प्रस्तावित ड्राफ्ट के लगभग सभी बिन्दुओं पर बिजली कर्मियों का एतराज है। हमारा मानना है कि यह बिल सरकारी क्षेत्र के डिस्कॉम की कीमत पर निजी क्षेत्र को मुनाफा कमाने का मार्ग प्रशस्त करने वाला बिल है। निजी कंपनियां मुनाफा कमाने के लिए सरकारी डिस्कॉम के नेटवर्क का इस्तेमाल कर केवल व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को ही बिजली आपूर्ति करेंगी, परिणामस्वरूप सरकारी क्षेत्र के डिस्कॉम आर्थिक तौर पर कंगाल हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि बिजली संविधान की समवर्ती सूची में है जिसका मतलब होता है कि बिजली के मामले में केन्द्र और राज्य सरकार का बराबर का अधिकार है। किन्तु इस बिल के जरिए केन्द्र सरकार बिजली के मामले में राज्यों की संप्रभुता का अतिक्रमण कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बिल में ऐसे अनेक प्राविधान हैं जिससे बिजली की कीमत में बेतहाशा वृद्धि होगी और बिजली आम घरेलू उपभोक्ताओं,किसानों की पहुंच से दूर हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि देश के सभी कर्मचारी और इंजीनियर संगठनों का मानना है कि यह बिल जनहित में नहीं है अतः पूरी तरह अस्वीकार्य है। इस बिल को वापस लिया जाय।
12 जनवरी को होने वाली वार्ता में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, सेक्रेटरी जनरल पी रत्नाकर राव, मुख्य संरक्षक पद्मजीत सिंह, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज के जनरल सेक्रेटरी मोहन शर्मा, इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के जनरल सेक्रेटरी सुदीप दत्ता, के अलावा देश के लगभग सभी प्रान्तों के बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों के सेवा संगठनों/ श्रम संघों के पदाधिकारी सम्मिलित होंगे।
उप्र से विद्युत अभियंता संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रभात सिंह और महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर भी वार्ता में सम्मिलित होंगे।
उप्र में चल रही बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया के विरोध में आज आंदोलन के 410 दिन पूरे होने पर बिजली कर्मियों ने उपभोक्ताओं, किसानों और आम लोगों के बीच व्यापक जनसंपर्क कर आंदोलन तेज करने की तैयारी की।

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