Homeराज्यउत्तर प्रदेशईंट-भट्ठा श्रमिकों के लिए पाठ्यक्रम बनाने की घोषणा

ईंट-भट्ठा श्रमिकों के लिए पाठ्यक्रम बनाने की घोषणा

बुनियाद की मुहिम से प्रेरित होकर यूपी स्किल डेवलपमेंट मिशन करेगा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित”

लाइव सत्यकाम न्यूज, लखनऊ : नीति-निर्माताओं, ईंट भट्ठा मालिकों, श्रमिक संगठनों और नागरिक समाज समूहों ने आज लखनऊ में आयोजित एक बहु-राज्यीय सम्मेलन “सतत ईंट उद्योग के लिए उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से नेतृत्व कारी पहल की संभावनाएं” में भाग लिया। यह आयोजन बुनियाद अभियान द्वारा किया गया था, जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश के ईंट उद्योग में न्याय-आधारित डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन में कमी) की दिशा में गति प्रदान करना है। यह उद्योग भारत के सबसे बड़े और सबसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में से एक है।

सम्मेलन में उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न सरकारी विभागों, उद्योग संघों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने मिलकर उन नीतिगत तंत्रों, वित्तीय प्रोत्साहनों और कौशल विकास के रास्तों पर चर्चा की, जो ईंट भट्ठा उद्योग में स्वच्छ और सतत तकनीकों को अपनाने में सहायक हो सकते हैं।

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकीय परिवर्तन को श्रमिक कल्याण, लैंगिक समानता और सामुदायिक हितों के साथ जोड़ा जाना चाहिए। भारत के ईंट उद्योग में लगभग 1.7 करोड़ लोग कार्यरत हैं, जिनमें से अधिकतर असंगठित, मौसमी और प्रवासी श्रमिक हैं। इसलिए, स्वच्छ ऊर्जा की ओर किसी भी बदलाव में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि श्रमिकों को सम्मानजनक आजीविका, बेहतर कार्य परिस्थितियाँ और सामाजिक सुरक्षा प्राप्त हों।

‘फाउंडेशन्स ऑफ चेंज’ पैनल में सरकारी प्रतिनिधियों, ईंट-भट्ठा मालिकों, श्रमिक संगठनों और सिविल सोसाइटी संगठनों ने एक साथ मिलकर उत्तर प्रदेश के ईंट-भट्ठा क्षेत्र में लोगों को केंद्र में रखकर परिवर्तन की दिशा तय की।

एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए पुलकित खरे, निदेशक, उत्तर प्रदेश स्किल डेवलपमेंट मिशन ने कहा कि उनका विभाग ईंट-भट्ठा श्रमिकों के कौशल विकास के लिए समर्पित पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध और तैयार है। उन्होंने बताया कि मिशन लघु एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करेगा, जिसमें तकनीकी, सॉफ्ट और डिजिटल स्किल्स, स्वच्छता संबंधी जानकारी शामिल होगी, साथ ही भट्ठा क्लस्टरों के पास प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे ताकि प्रवासी श्रमिक आसानी से इसका लाभ उठा सकें।

अन्य वक्ताओं ने तकनीकी सुधार, उचित मजदूरी, महिला भागीदारी और श्रमिक कल्याण योजनाओं की आवश्यकता पर बल दिया — जो एक समावेशी और सतत ईंट-भट्ठा क्षेत्र की दिशा में सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के ईंट भट्ठा उद्योग को एक सतत और न्यायपूर्ण भविष्य की दिशा में अग्रसर करने के लिए कई परस्पर जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। चर्चा का एक प्रमुख क्षेत्र प्रोत्साहन और नीतिगत समर्थन रहा, जिसमें प्रतिभागियों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME), श्रम तथा कौशल विकास जैसे विभागों द्वारा प्रदान की जा रही या संभावित सब्सिडियों, योजनाओं और तंत्रों की समीक्षा की। इन पहलों को ईंट भट्ठा मालिकों को स्वच्छ ऊर्जा और अधिक दक्ष उत्पादन प्रणालियों की ओर अग्रसर करने के लिए आवश्यक साधन माना गया।

इसी तरह, तकनीकी बदलाव के वित्तपोषण पर हुई चर्चा भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही। वक्ताओं ने यह रेखांकित किया कि छोटे और मध्यम भट्ठा संचालकों के लिए सुलभ और समावेशी वित्तीय मॉडल तैयार करने की आवश्यकता है। विचार-विमर्श के दौरान यह भी बताया गया कि सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों से मिलने वाले वित्तीय उपकरण, जैसे कम-ब्याज ऋण, हरित सब्सिडी और जोखिम-निवारण तंत्र, इस क्षेत्र के असंगठित और सूक्ष्म उद्यमों के लिए स्वच्छ तकनीक को अपनाने को व्यवहार्य बना सकते हैं।

एक अन्य प्रमुख विषय कौशल विकास रहा, जिसमें यह बताया गया कि श्रमिकों और मालिकों, दोनों का तकनीकी कौशल-वृद्धि, किसी भी तकनीकी परिवर्तन की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रतिभागियों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप, मांग-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएँ, जो केवल तकनीकी ज्ञान ही न दें, बल्कि श्रमिकों में आत्मविश्वास भी पैदा करें ताकि वे और भट्ठा मालिक स्वच्छ उत्पादन प्रक्रियाओं को सहजता से अपना सकें।

चर्चाएँ समावेशी औद्योगिक रूपांतरण पर भी केंद्रित रहीं, जिनमें यह जोर दिया गया कि तकनीकी संक्रमण के प्रयासों को श्रमिक कल्याण, लैंगिक समानता और सामुदायिक हितों के साथ जोड़ा जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते इस परिवर्तन में यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि श्रमिकों को सम्मानजनक आजीविका, बेहतर कार्य परिस्थितियाँ और सामाजिक सुरक्षा प्राप्त हो।

साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि ईंट उद्योग में सतत परिवर्तन को केवल पर्यावरणीय मानकों तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए। इसके प्रभावों और लाभों को इस उद्योग के सबसे संवेदनशील वर्गों, विशेषकर महिलाओं और प्रवासी श्रमिकों, तक पहुँचाना उतना ही आवश्यक है।

अंततः, कार्यक्रम ने अन्य राज्यों से सीखने के महत्व को भी रेखांकित किया। बिहार और अन्य क्षेत्रों के सफल उदाहरणों एवं नीतिगत अनुभवों को साझा किया गया, जो उत्तर प्रदेश के लिए एक ठोस और व्यवहारिक राज्य-विशिष्ट ढाँचा तैयार करने में मार्गदर्शन करेंगे, ऐसा ढाँचा जो स्वच्छ तकनीक, श्रमिक कल्याण और समावेशी विकास को एकीकृत दृष्टिकोण के तहत जोड़ता हो।

साझी प्रतिबद्धताएँ और आगे का रास्ता-

सम्मेलन ने राज्य के विभिन्न विभागों से आह्वान किया कि वे कौशल विकास और वित्तीय सहायता से संबंधित कार्ययोजनाओं को अपने विभागीय दायित्वों के अनुरूप आगे बढ़ाएँ, और गैर-राज्यीय हितधारक “नागरिक मांग पत्र” (Citizen Demand Charter) का समर्थन करते हुए इसे जन-आंदोलन के रूप में आगे ले जाएँ।

सभी प्रतिभागियों ने मिलकर एक स्वच्छ, न्यायपूर्ण और लचीले ईंट उद्योग के निर्माण के लिए साझा रोडमैप तैयार करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कार्यक्रम का आयोजन बुनियाद की प्रतिनिधि संस्था क्लाइमेट एजेंडा द्वारा किया गया.

बुनियाद अभियान के बारे में-

बुनियाद एक बहु-हितधारक मंच है, जो उत्तर प्रदेश के ईंट भट्ठा उद्योग में न्याय-आधारित डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन में कमी) को आगे बढ़ाने के लिए कार्यरत है। इस मंच में 200 से अधिक सदस्य शामिल हैं, जिनमें श्रमिक, भट्ठा मालिक, उद्योग संघ, सामुदायिक नेता, नागरिक समाज संगठन, शोधकर्ता और मीडिया प्रतिनिधि शामिल हैं।

बुनियाद उत्तर प्रदेश के उन ज़िलों में सक्रिय है जहाँ ईंट भट्ठों की घनत्व अधिक है, जैसे वाराणसी, प्रतापगढ़, लखनऊ, जौनपुर, अंबेडकर नगर, मथुरा, शामली और मुज़फ्फरनगर। यह मंच संवाद, ज्ञान-विनिमय और सामूहिक एडवोकेसी के माध्यम से एक जन-केंद्रित औद्योगिक परिवर्तन को बढ़ावा देता है।

अधिक जानकारी के लिए: www.buniyaadinitiative.in

द क्लाइमेट एजेंडा (TCA) के बारे में-

द क्लाइमेट एजेंडा (TCA) एक नागरिक समाज संगठन है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य, आजीविका और जलवायु समानता (Climate Equity) के संगम पर कार्य करता है। टीसीए के कार्यक्रम विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ और समावेशी परिवहन, तथा औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन को जनसहभागिता और नीतिगत संवाद के माध्यम से आगे बढ़ाते हैं।

यह संगठन 100% यूपी नेटवर्क का नेतृत्व करता है और 2022 से बुनियाद पहल का संस्थापक साझेदार रहा है।

RELATED ARTICLES

Most Popular