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निजीकरण का निर्णय वापस लिया जाय तो बिजली कर्मी दिन रात मेहनत कर श्रेष्ठतम योगदान देने में सक्षम

लाइव सत्यकाम न्यूज,लखनऊ : विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आज कहा कि जब पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल खुद कह रहे हैं कि विद्युत वितरण के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार हुआ है तब निजीकरण का क्या औचित्य रह जाता है ? संघर्ष समिति ने कहा कि साल 2026 की शुरुआत अभी हुई है। यदि पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन निजीकरण का निर्णय वापस लेने की घोषणा कर दे तो बिजली कर्मी दिन रात मेहनत कर प्रदेश के ऊर्जा निगमों को देश के शीर्ष ऊर्जा निगमों की श्रेणी में लाने में सक्षम हैं।
उल्लेखनीय है कि नए साल के पहले दिन पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन ने शक्ति भवन में कहा है कि विद्युत वितरण, पारेषण और उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार हुआ है। प्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र लगातार प्रगति कर रहा है और इस साल हम नया रिकॉर्ड बनाएंगे।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों ने वर्ष 2025 में भी 31618 मेगावाट बिजली आपूर्ति कर देश में सर्वाधिक बिजली आपूर्ति का रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2025 में महा कुम्भ में बिजली कर्मियों द्वारा किया गया कार्य इतिहास में दर्ज हो चुका है।
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री कई बार प्रदेश में बिजली व्यवस्था में सुधार और बिजली कर्मियों की सार्वजनिक तौर पर प्रशंसा करते रहे हैं। ऊर्जा मंत्री श्री अरविन्द कुमार शर्मा जी ने विधान सभा में हाल ही में यह भी कहा है कि बिजली के निजीकरण का अभी कोई निर्णय नहीं है।
संघर्ष समिति ने कहा कि मा ऊर्जा मंत्री और चेयरमैन दोनों ही शीर्ष लोग यह स्वीकार कर रहे हैं कि बिजली व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार हुआ है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण की प्रक्रिया के विरोध में लगातार 401 दिन से बिजली कर्मी सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। निजीकरण का निर्णय वापस ले लिया जाय तो बिजली कर्मी पूर्ण मनोयोग के साथ संकल्प लेकर बिजली व्यवस्था के और सुधार में पूर्ण मनोयोग से जुट जायेंगे।
संघर्ष समिति ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन को यह स्वीकार करना चाहिए कि निजीकरण की प्रक्रिया से ऊर्जा निगमों में टकराव पैदा हुआ है और कार्य का वातावरण बिगड़ा है।
ऊर्जा मंत्री कह रहे हैं निजीकरण का कोई निर्णय नहीं है,सुधार हो रहा है। चेयरमैन ऐतिहासिक सुधार कह रहे हैं तो समय की मांग है कि निजीकरण का निर्णय वापस लेकर कार्य का वातावरण बनाया जाय।
निजीकरण के विरोध में चल रहे लगातार आंदोलन के आज 401 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

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