लाइव सत्यकाम न्यूज, लखनऊ : विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि निजीकरण के एकतरफा निर्णय के विरोध में विगत एक वर्ष से शान्ति पूर्वक आंदोलन रत बिजली कर्मियों का बिना कारण उत्पीड़न कर पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन ने ऊर्जा निगमों में कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से अनुरोध किया है कि वह प्रभावी हस्तक्षेप कर निजीकरण का फैसला निरस्त कराने की कृपा करें और पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन को निर्देश दें कि बिजली कर्मियों पर अनावश्यक तौर पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त की जाय।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों का प्रदेश के मुख्यमंत्री पर पूरा भरोसा है और उनके कुशल नेतृत्व में बिजली कर्मी लगातार सुधार में लगे हुए हैं। पिछले एक साल से आंदोलनरत होते हुए भी बिजली कर्मियों ने भीषण गर्मी में 31618 मेगावाट बिजली आपूर्ति कर देश में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। बिजली कर्मियों के प्रयास से हो रहे सतत सुधार का ही परिणाम है कि लगातार छह वर्षों से उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं के लिए बिजली टैरिफ बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ी। इसके बावजूद पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन बिजली कर्मियों का उत्पीड़न कर कार्य का वातावरण खराब कर रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्पीड़न के नाम पर हजारों अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों को नौकरी से निकाल दिया गया है, संघर्ष समिति के शीर्ष पदाधिकारियों पर स्टेट विजिलेंस की जांच कर झूठी एफआईआर की जा रही है, कार्यालय समय के उपरांत सभा में भाग लेने वाले हजारों बिजली कर्मियों का जिसमें महिलाएं भी शामिल है बड़े पैमाने पर दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर किया गया, पिछले एक साल में कई बार संघर्ष समिति के पदाधिकारियों और सक्रिय कार्यकर्ताओं को परामर्श के नाम पर चेतावनी देकर उनके व्यक्तिगत फाइल में रखा गया। सबसे ताजा उत्पीड़न की घटना यह है कि 87 अभियंताओं को कार्यालय समय के उपरांत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भाग न लेने के चलते दिए गए परामर्श पत्र के आधार पर उनकी पदोन्नतियां रोक दी गई हैं जो मनमानेपन की इंतिहा है।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन, कार्यालय समय के उपरांत की जा रही गतिविधियों के आधार पर जिस प्रकार बिजली कर्मियों का उत्पीड़न कर रहा है, उससे ऊर्जा निगमों में गुस्सा बढ़ गया है और उसके परिणाम की जिम्मेदारी पावर कारपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन की होगी।
निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 362 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन की कार्यवाहियों से ऊर्जा निगमों में बिगड़ गया है कार्य का स्वस्थ वातावरण
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