Homeराज्यउत्तर प्रदेशराजधानी लखनऊ में अपर श्रम आयुक्त को सौंपा ज्ञापन

राजधानी लखनऊ में अपर श्रम आयुक्त को सौंपा ज्ञापन

लाइव सत्यकाम न्यूज, लखनऊ : बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स, केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में आज बिजली कर्मियों, किसानों और ट्रेड यूनियनों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
राजधानी लखनऊ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उप्र., केंद्रीय ट्रेड यूनियनों एटक, सीटू, एचएमएस, इंटक, एआईयूटीयूसी, किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने अपर श्रम आयुक्त के कार्यालय पर बिजली के निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया और अपर श्रम आयुक्त को ज्ञापन दिया। ज्ञापन मा. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं मा. मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को संबोधित है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे व संघर्ष समिति से जुडे सभी श्रम संघों, जूनियर इंजीनियर्स संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष जी.वी. पटेल, एटक के प्रदेश महामंत्री चंद्रशेखर, इंटक के दिलीप श्रीवास्तव, सीटू के राहुल मिश्रा, यूपी वर्कर्स फ्रंट के दिनकर कपूर, हिन्द मजदूर सभा के अविनाश पाण्डेय, आंगनबाड़ी की बबीता, ऑल इण्डिया किसान सभा के के.आर. यादव, क्रांतिकारी किसान यूनीयन के एकादशी यादव, उप्र. किसान सभा के प्रवीन सिंह, बीएमएस के दिनेश कुमार के नेतृत्व में सैकड़ों बिजली कर्मचारियों और किसानों ने विरोध प्रदर्शन कर अपर श्रम आयुक्त को ज्ञापन दिया।
अपर श्रम आयुक्त के माध्यम से मा. प्रधानमंत्री और मा. मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में मुख्य रुप से निम्न बिंदू उठाए गए हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के जरिए केंद्र सरकार देश के संपूर्ण विद्युत वितरण क्षेत्र का निजीकरण करना चाहती है। सरकारी विद्युत वितरण कंपनियों का नेटवर्क इस्तेमाल करने की निजी कंपनियों को छूट दी जाएगी और निजी कंपनियां केवल मुनाफे वाले क्षेत्र में बिजली आपूर्ति करेंगे। परिणाम स्वरुप सरकारी विद्युत वितरण निगमों के पास कृषि और गरीब उपभोक्ताओं का घाटे वाला क्षेत्र रह जाएगा और सरकारी विद्युत वितरण कंपनियां कंगाल हो जाएंगे। इसके साथ ही इस बिल में सब्सिडी समाप्त करने का प्रावधान है। इसके बाद बिजली इतनी महंगी हो जाएगी कि किसानों और गरीब उपभोक्ताओं की पहुंच से बिजली दूर हो जाएगी।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अन्तर्गत प्रदेश के सबसे गरीब 42 जनपद आते हैं। इनके निजीकरण से सबसे बड़ी चोट गरीब उपभोक्ताओं पर पड़ने वाली है। संघर्ष समिति ने कहा कि उपभोक्ताओं की सहमति के बगैर जबरदस्ती स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं जिससे लोगों में बहुत गुस्सा है। बिजली कर्मचारी उपभोक्ताओं के हित में इसका भी विरोध कर रहे हैं।
निजीकरण के विरोध में चल रहे लगातार आंदोलन के आज 392वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों में किसानों और ट्रेड यूनियनों के साथ संयुक्त रुप से व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।

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