लाइव सत्यकाम न्यूज,लखनऊ : विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आज खुलासा किया कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने बिजली वितरण निगमों के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पर आम सहमति बनाने के लिए आगामी 22-23 जनवरी को सभी राज्यों के विद्युत मंत्रियों और अधिकारियों की मीटिंग बुलाई है।
संघर्ष समिति ने बताया कि दो दिवसीय बैठक में मुख्य रूप से डिस्कॉम निजीकरण के लिए वित्तीय पैकेज, फ्रेंचाइजी मॉडल और डिस्कॉम की समयबद्ध लिस्टिंग से संबंधित मुद्दों पर चर्चा होगी और निर्णय लिया जायेगा।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि उपभोक्ताओं और किसानों के हितों को दरकिनार कर बिजली वितरण निगमों का निजीकरण करने का कोई एकतरफा निर्णय लिया गया तो इसकी तीखी प्रतिक्रिया होगी और उप्र सहित देश के तमाम 27 लाख बिजली कर्मचारी राष्ट्रव्यापी आन्दोलन प्रारम्भ करने हेतु बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों की होगी।
संघर्ष समिति ने कहा कि एक ओर राज्य सरकार निजीकरण का निर्णय लेकर पॉवर सेक्टर में निजी क्षेत्र की मनॉपली स्थापित करने में लगी है जो किसी भी तरह उचित नहीं है। अब केन्द्र सरकार वित्तीय पैकेज के नाम पर बिजली वितरण निगमों के निजीकरण, फ्रेंचाइजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के जरिए सरकारी विद्युत वितरण निगमों का नेटवर्क निजी घरानों को इस्तेमाल करने की अनुमति देने की तैयारी कर रही है। इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल के जरिए सब्सिडी और क्रॉस सब्सिडी समाप्त करने की कोशिश और कॉस्ट रिफ्लेक्टिव टैरिफ किसी भी प्रकार किसानों और गरीब उपभोक्ताओं के हित में नहीं है ।
संघर्ष समिति ने बताया कि इस मीटिंग में बिजली मंत्रालय राज्यों के बीच बिजली (संशोधन) विधेयक के मसौदे पर भी सहमति बनाने की कोशिश करेगा जिससे बिजली (संशोधन) विधेयक संसद के आगामी बजट सत्र में पेश किया जा सके ।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के निर्णय के विरोध में उप्र के बिजली कर्मी तमाम उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के बावजूद विगत 406 दिनों से लगातार संघर्षरत हैं और संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त नहीं होतीं।
आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।


