केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। राहुल गांधी ने CBSE की नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और EduTech कंपनी को दिए गए ठेके पर सवाल उठाते हुए बड़े घोटाले का आरोप लगाया था। अब बोर्ड ने इन आरोपों को “गलत, भ्रामक और तथ्यों से परे” बताया है।
दरअसल, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया था कि CBSE परीक्षा परिणामों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और लाखों छात्र एवं उनके माता-पिता इससे प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बोर्ड ने ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी OSM प्रणाली के लिए जिस कंपनी को ठेका दिया, उसका रिकॉर्ड पहले से विवादित रहा है।
राहुल गांधी के अनुसार, OSM का काम संभालने वाली कंपनी COEMPT EduTech पहले ग्लोबरीना नाम से काम करती थी। उन्होंने दावा किया कि इस कंपनी का नाम तेलंगाना बोर्ड परीक्षा विवादों में भी सामने आ चुका है। कांग्रेस नेता ने कहा कि 2019 और 2023 में तेलंगाना में इसी तरह की तकनीकी गड़बड़ियों ने छात्रों को भारी मानसिक तनाव में डाल दिया था।
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि इन त्रुटियों के कारण तेलंगाना में कई छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कंपनी का रिकॉर्ड पहले से विवादों में था, तो फिर CBSE ने उसी एजेंसी को दोबारा क्यों चुना।
इन आरोपों के बाद CBSE ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि एजेंसी को ठेका देने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से अपनाई गई थी। बोर्ड के अनुसार, 28 अगस्त 2025 को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर बोर्ड परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन के लिए निविदा यानी RFP जारी की गई थी।
CBSE ने स्पष्ट किया कि सामान्य वित्तीय नियमों और सरकारी प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करते हुए योग्य बोलीदाता को यह ठेका दिया गया। बोर्ड ने कहा कि राहुल गांधी के आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और जनता को भ्रमित करने वाले हैं।
वहीं कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर हमला तेज कर दिया है। पार्टी ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कंपनी को जिम्मेदारी क्यों दी गई, जिसका नाम पहले विवादों में सामने आ चुका है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच और SIT जांच की मांग भी की है।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि CBSE के लाखों छात्र और उनके परिवार परेशान हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं दिया जा रहा। उन्होंने छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर सवाल उठाएं और पारदर्शिता की मांग करें।
इस विवाद ने शिक्षा व्यवस्था और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन भविष्य की जरूरत है, लेकिन इसके लिए पारदर्शिता और तकनीकी विश्वसनीयता बेहद जरूरी है।
फिलहाल CBSE अपने रुख पर कायम है और बोर्ड का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और नियमों के अनुसार संचालित की जा रही है। दूसरी तरफ विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक और छात्र हितों से जोड़कर लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
अब देखना होगा कि यह विवाद आगे कितना बढ़ता है और क्या केंद्र सरकार या जांच एजेंसियां इस मामले में कोई नई कार्रवाई करती हैं।
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