भारतीय पूंजी बाजार को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निवेशक-अनुकूल बनाने के लिए Securities and Exchange Board of India ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य निवेशकों की परेशानियों को कम करना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और बाजार में भरोसा मजबूत करना है।
मुंबई में आयोजित SEBI की 214वीं बोर्ड बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें मृत निवेशकों की संपत्तियों के हस्तांतरण से लेकर शेयर बायबैक, निवेश फंड और कर्मचारियों की नई आचार संहिता तक कई बड़े बदलाव शामिल हैं।
मृत निवेशकों के दावों का होगा तेजी से निपटारा
SEBI ने उन मामलों में नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है, जहां किसी निवेशक की मृत्यु के बाद उसकी प्रतिभूतियों को कानूनी उत्तराधिकारियों या दावेदारों के नाम स्थानांतरित किया जाता है।
अब कम मूल्य वाले दावों के लिए त्वरित हस्तांतरण प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसका मकसद कागजी प्रक्रिया को कम करना और दावों के निपटारे को तेज बनाना है।
इसके अलावा:
दस्तावेजों की संख्या कम की जाएगी।
कुछ मामलों में PAN जमा करने की अनिवार्यता हटाई गई है।
त्वरित संकेतांक आधारित मृत्यु प्रमाण पत्र को भी मान्यता दी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे परिवारों को लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी।
Share Buyback के नियम फिर होंगे लागू
SEBI ने शेयर बाजार के जरिए खुले बाजार में शेयर पुनर्खरीद यानी Buyback प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की मंजूरी दी है।
यह व्यवस्था 1 अगस्त से लागू होगी। हालांकि, इसके लिए पहले से अधिक सख्त नियम और नई समय-सीमा तय की गई है, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कंपनियों और निवेशकों दोनों को फायदा मिल सकता है।
सामूहिक निवेश योजनाओं को राहत
SEBI ने सामूहिक निवेश योजनाओं को अस्थायी नकदी असंतुलन की स्थिति में एक कारोबारी दिन के भीतर अल्पकालिक उधार लेने की अनुमति देने का फैसला किया है।
इस कदम से निवेशकों के फंड का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा और संचालन में लचीलापन आएगा।
Alternative Investment Funds को मिलेगी तेजी
वैकल्पिक निवेश कोष यानी Alternative Investment Funds (AIF) के लिए मंजूरी प्रक्रिया को भी तेज किया गया है।
नई गरुड़ व्यवस्था के तहत अब इन प्रस्तावों को 10 कार्य दिवसों के भीतर मंजूरी देने का लक्ष्य रखा गया है।
इससे नए निवेश उत्पादों को बाजार में जल्दी उतारा जा सकेगा।
नगर निकायों को मिलेगा फायदा
SEBI ने शहरी विकास परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने को आसान बनाने के उद्देश्य से नगर निकाय ऋण बाजार में भी नए सुधारों को मंजूरी दी है।
इसके तहत:
पुनर्वित्त व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा।
सामूहिक वित्तपोषण मॉडल को प्रोत्साहित किया जाएगा।
इससे शहरों के विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
छोटे उद्योगों के लिए भी बदलाव
छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) के लिए पूंजी जुटाने की व्यवस्था की भी समीक्षा की जाएगी।
वित्त वर्ष 2026-27 को ध्यान में रखते हुए नए बदलाव किए जाएंगे ताकि इन उद्योगों को वित्तीय संसाधन आसानी से उपलब्ध हो सकें।
SEBI कर्मचारियों के लिए नई आचार संहिता
SEBI ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नई आचार संहिता को भी मंजूरी दी है।
इसका उद्देश्य:
हितों के टकराव को रोकना।
जवाबदेही बढ़ाना।
पारदर्शिता मजबूत करना।
सूचना के खुलासे से जुड़े नियमों को और प्रभावी बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी सुधारों से भारतीय पूंजी बाजार अधिक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और निवेशकों के लिए सुरक्षित बनेगा।
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