पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी संगठनात्मक विवाद और बगावत के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने राज्य इकाई की अध्यक्ष की जिम्मेदारी स्वयं संभालने का ऐलान कर दिया। इस फैसले को पार्टी में जारी उथल-पुथल के बीच नेतृत्व को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि वह अब ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ-साथ पश्चिम बंगाल राज्य इकाई की अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभाएंगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि मदन मित्रा और कुणाल घोष को राज्य समिति में महासचिव नियुक्त किया गया है, ताकि संगठन को और मजबूत बनाया जा सके।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर बगावत खुलकर सामने आ चुकी है। विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले एक गुट ने अलग नेतृत्व संरचना बनाने का दावा किया है। इस गुट ने पार्टी मुख्यालय पर कब्जा करने का भी दावा किया, जिसके बाद कोलकाता स्थित राज्य कार्यालय में तनाव का माहौल बन गया।
इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पश्चिम बंगाल टीएमसी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने ममता बनर्जी को भेजे अपने इस्तीफे में राज्य अध्यक्ष पद छोड़ने की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और चुनाव आयोग के समक्ष अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में भी अपना नाम वापस लेने की घोषणा की।
दूसरी ओर, रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने पार्टी के लिए नए नेतृत्व ढांचे का ऐलान किया। इस गुट ने अरूप रॉय को अध्यक्ष नियुक्त किया और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्य समिति (NWC) के गठन की घोषणा की। समिति में कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है और कुछ नेताओं को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
बागी गुट ने यह भी कहा कि वह चाहता है कि ममता बनर्जी संगठन में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाती रहें। उनके अनुसार, पार्टी के भीतर ममता बनर्जी का अनुभव और नेतृत्व भविष्य में भी महत्वपूर्ण रहेगा। हालांकि, संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं।
रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का दावा है कि उसे पार्टी के 80 में से 58 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। हालांकि, इस दावे पर टीएमसी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर पैदा हुआ यह संकट पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में संगठनात्मक विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और पार्टी नेतृत्व इसे किस तरह संभालता है।
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