ईरान की राजनीति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। इज़राइली मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन को कथित तौर पर “आखिरी अल्टीमेटम” दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े अहम मामलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका पहले से अधिक मजबूत होती दिखाई दे रही है।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
इज़राइली ब्रॉडकास्टर चैनल 14 की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और ईरानी नेतृत्व के बीच विदेश नीति तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर लंबे समय से मतभेद बने हुए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पेज़ेशकियन ने कई बार इस्तीफे की पेशकश की थी और मई में औपचारिक रूप से पद छोड़ने की कोशिश भी की थी।
रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति का आरोप था कि उनके प्रशासन को राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में पर्याप्त भूमिका नहीं दी जा रही थी। हालांकि, इन दावों की किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है।
IRGC की भूमिका क्यों चर्चा में है?
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि IRGC के वरिष्ठ कमांडर अहमद वाहिदी का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। बताया गया है कि अमेरिका और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में उनकी रणनीति को प्राथमिकता दी जा रही है।
यदि यह दावा सही साबित होता है, तो इससे संकेत मिल सकता है कि ईरान की रणनीतिक नीतियों में सैन्य नेतृत्व की भूमिका और मजबूत हो रही है। हालांकि, इस संबंध में भी कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अमेरिका-ईरान संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?
रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान और वाशिंगटन के बीच फिलहाल कोई औपचारिक प्रत्यक्ष वार्ता नहीं चल रही है। बताया गया है कि दोनों देशों के बीच संपर्क मुख्य रूप से अप्रत्यक्ष माध्यमों से हो रहा है, जिसमें क्षेत्रीय देशों की मध्यस्थता भी शामिल है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि राजनीतिक मतभेद गहराते हैं तो भविष्य में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बातचीत और अधिक जटिल हो सकती है।
ट्रंप के बयान के बाद बढ़ी चर्चा
रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को समझौते के लिए “आखिरी मौका” दिए जाने की बात कही है। ट्रंप ने यह भी कहा कि कूटनीतिक प्रयासों को मौका देने के लिए अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक रखा था।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से आधिकारिक स्तर पर कई दावों की पुष्टि अभी बाकी है।
क्या ईरान में बदल रहा है सत्ता संतुलन?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राष्ट्रपति कार्यालय की भूमिका सीमित होती है और सुरक्षा संस्थानों का प्रभाव बढ़ता है, तो ईरान की आंतरिक और बाहरी नीति पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से मीडिया रिपोर्टों और अनाम सूत्रों पर आधारित है।
ऐसे में आने वाले दिनों में ईरान सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले घटनाक्रम इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।
निष्कर्ष
ईरान में कथित राजनीतिक तनाव और IRGC की बढ़ती भूमिका को लेकर कई दावे सामने आए हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को सावधानी के साथ देखना आवश्यक है। आने वाले समय में ईरान, अमेरिका और पश्चिम एशिया की राजनीति में होने वाले बदलाव इस मुद्दे को और स्पष्ट करेंगे।
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