हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अच्छी आदतों के साथ बड़ा हो और भविष्य में आत्मविश्वासी और जिम्मेदार इंसान बने। इसके लिए माता-पिता बच्चों को प्यार, अनुशासन और सही मार्गदर्शन देने की कोशिश करते हैं। लेकिन कई बार बच्चों की परवरिश के दौरान अनजाने में ऐसी गलतियां हो जाती हैं, जिनका असर उनके व्यवहार पर पड़ सकता है। बच्चे का बार-बार जिद करना, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना या अपनी बात मनवाने के लिए जिद पर अड़ जाना भी इसी तरह के व्यवहार से जुड़ा हो सकता है।
हालांकि हर बच्चे का स्वभाव अलग होता है और उसके व्यवहार के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इसलिए बच्चे के जिद्दी या गुस्सैल व्यवहार को केवल माता-पिता की गलतियों से जोड़ना सही नहीं होगा। फिर भी कुछ parenting habits ऐसी हैं, जिनसे बचना बच्चों के भावनात्मक और सामाजिक विकास के लिए फायदेमंद हो सकता है।
1. अनुशासन की कमी
बच्चों को प्यार देना जरूरी है, लेकिन प्यार के साथ उम्र के अनुसार कुछ स्पष्ट नियम और सीमाएं भी जरूरी होती हैं। जब माता-पिता बच्चे की हर मांग पूरी कर देते हैं और गलत व्यवहार पर भी कोई सीमा तय नहीं करते, तो बच्चे को अपनी इच्छाओं और नियमों के बीच अंतर समझने में परेशानी हो सकती है।
वहीं दूसरी तरफ जरूरत से ज्यादा सख्ती और हर छोटी बात पर रोक-टोक भी बच्चे पर नकारात्मक असर डाल सकती है। बेहतर तरीका यह है कि घर में कुछ सरल और स्पष्ट नियम बनाए जाएं और उन्हें लगातार एक समान तरीके से लागू किया जाए।
2. हर मांग पूरी कर देना
बच्चे की हर इच्छा पूरी करना प्यार जताने का तरीका लग सकता है, लेकिन लगातार ऐसा करने से बच्चे में चीजें तुरंत पाने की आदत विकसित हो सकती है। जब किसी समय माता-पिता उसकी मांग पूरी नहीं करते, तो बच्चा गुस्सा या जिद के जरिए अपनी बात मनवाने की कोशिश कर सकता है।
इसलिए जरूरी है कि माता-पिता बच्चे की जरूरत और उसकी हर इच्छा के बीच अंतर समझें। अगर किसी मांग को पूरा करना संभव या उचित नहीं है, तो बच्चे को शांत तरीके से इसकी वजह समझाना बेहतर है।
3. दूसरे बच्चों से तुलना करना
“देखो, तुम्हारा दोस्त कितना अच्छा पढ़ता है” या “तुम अपने भाई-बहन की तरह क्यों नहीं हो?” जैसी बातें बच्चे के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। बार-बार तुलना किए जाने पर बच्चा खुद को कमतर महसूस कर सकता है और माता-पिता से नाराजगी भी बढ़ सकती है।
हर बच्चे की क्षमता, रुचि और सीखने की गति अलग होती है। इसलिए तुलना करने के बजाय उसके अपने प्रयास और सुधार पर ध्यान देना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
4. बात-बात पर चिल्लाना
बच्चे की हर गलती पर तेज आवाज में डांटना या चिल्लाना समस्या का समाधान नहीं होता। इससे बच्चा डर सकता है, बातचीत से बचने लग सकता है या खुद भी गुस्से में प्रतिक्रिया देना सीख सकता है।
अगर बच्चा गलती करता है, तो पहले उसे शांत करके यह समझाना बेहतर है कि उसने क्या गलत किया और अगली बार उसे क्या करना चाहिए। माता-पिता का व्यवहार बच्चों के लिए एक उदाहरण भी बनता है। इसलिए घर में बातचीत का तरीका बच्चे के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।
प्यार और अनुशासन के बीच संतुलन जरूरी
बच्चों की परवरिश में न तो अत्यधिक लाड़-प्यार सही है और न ही हर बात पर कठोरता। बच्चों को यह महसूस होना चाहिए कि माता-पिता उनकी बात सुनते हैं, लेकिन साथ ही उन्हें सही और गलत के बीच अंतर समझाने के लिए स्पष्ट सीमाएं भी तय करते हैं।
अगर बच्चा लगातार बहुत ज्यादा गुस्सा करता है, बेहद आक्रामक व्यवहार करता है, स्कूल या घर में उसके व्यवहार से गंभीर परेशानी हो रही है या उसके व्यवहार में अचानक बड़ा बदलाव आया है, तो केवल डांटने के बजाय किसी बाल रोग विशेषज्ञ या बाल मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना बेहतर हो सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों के व्यवहार को सुधारने के लिए धैर्य और निरंतरता जरूरी है। माता-पिता अगर बच्चे की बात सुनें, स्पष्ट सीमाएं तय करें और गलत व्यवहार पर शांत लेकिन दृढ़ प्रतिक्रिया दें, तो बच्चे को अपनी भावनाओं और व्यवहार को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।
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