डायबिटीज को लेकर आमतौर पर लोगों के मन में यही धारणा रहती है कि ज्यादा मीठा खाने से ही यह बीमारी होती है। हालांकि, हकीकत इससे कहीं ज्यादा व्यापक है। खानपान के साथ-साथ हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि, नींद और भोजन का समय भी मेटाबॉलिक हेल्थ पर असर डाल सकता है। सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक की कुछ आदतें लंबे समय में ब्लड शुगर बढ़ने और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम से जुड़ी हो सकती हैं।
दिल्ली स्थित एम्स के एंडोक्राइनोलॉजी और मेटाबॉलिज्म विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश खड़गावत ने रोजमर्रा की खानपान संबंधी आदतों पर ध्यान देने की जरूरत बताई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, डायबिटीज से बचाव के लिए केवल चीनी कम करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे दिन के भोजन और दिनचर्या को संतुलित रखना जरूरी है।
सुबह की चाय के साथ क्या लेते हैं?
कई लोगों की सुबह चाय या कॉफी से होती है और इसके साथ बिस्किट, नमकीन या मीठे स्नैक्स खाने की आदत होती है। अगर यह रोज की दिनचर्या बन जाए तो शरीर में अतिरिक्त कैलोरी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ सकती है।
सुबह का नाश्ता ऐसा होना चाहिए जिसमें फाइबर और प्रोटीन की अच्छी मात्रा हो। दाल, अंडा, दही, सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
दिनभर बैठे रहना भी नुकसानदायक
आजकल ऑफिस और घर से काम करने की वजह से लोगों का काफी समय कुर्सी पर बैठकर गुजरता है। लगातार लंबे समय तक बैठे रहना और शारीरिक गतिविधि कम होना भी मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता।
दिन में नियमित रूप से चलना-फिरना और अपनी उम्र तथा स्वास्थ्य के अनुसार व्यायाम करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी है, उन्हें व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
बार-बार प्रोसेस्ड फूड खाने की आदत
पैकेज्ड स्नैक्स, मिठाई, केक, मीठे पेय और दूसरे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का बार-बार सेवन भी समस्या बढ़ा सकता है। इन चीजों में अक्सर ज्यादा कैलोरी, चीनी, नमक या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह डायबिटीज का कारण माना जाए। असली चिंता तब होती है जब असंतुलित भोजन लंबे समय तक रोज की आदत बन जाता है।
रात में देर से और ज्यादा खाना
देर रात भारी भोजन करना और खाना खाने के तुरंत बाद सो जाना भी अच्छी दिनचर्या नहीं मानी जाती। कोशिश करनी चाहिए कि रात का भोजन संतुलित और जरूरत के मुताबिक हो।
इसके साथ पर्याप्त नींद भी जरूरी है। लगातार नींद पूरी न होना और अनियमित दिनचर्या शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकती है।
सिर्फ मीठा छोड़ना पर्याप्त नहीं
डायबिटीज से बचाव के लिए केवल मिठाई और चीनी को कम करना पर्याप्त नहीं है। पूरे दिन में क्या खाया जा रहा है, कितनी मात्रा में खाया जा रहा है, शरीर कितना सक्रिय है और नींद कैसी है—इन सभी बातों पर ध्यान देना जरूरी है।
संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और स्वस्थ वजन बनाए रखने की कोशिश टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
अगर किसी व्यक्ति को लगातार बहुत ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, बिना वजह वजन कम होना या असामान्य थकान जैसे लक्षण नजर आते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेकर ब्लड शुगर की जांच कराना उचित है। डायबिटीज का जोखिम हर व्यक्ति में अलग हो सकता है, इसलिए व्यक्तिगत सलाह के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना सबसे बेहतर विकल्प है।
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