हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल्स ने बिड़ला टायर्स को लेकर एक बड़ी विस्तार योजना तैयार की है। कंपनी का लक्ष्य आने वाले कुछ वर्षों में बिड़ला टायर्स के कारोबार को करीब 3,000 करोड़ रुपये के राजस्व वाले व्यवसाय में बदलना है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत कंपनी प्रीमियम टायर, निर्यात बाजार और इलेक्ट्रिक वाहनों यानी ईवी टायर सेगमेंट पर खास फोकस करने की तैयारी में है। इसके साथ ही नए प्रोडक्ट और नए बाजारों में एंट्री को भी कंपनी की ग्रोथ रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
दरअसल, हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल्स ने साल 2023 में दिवाला समाधान योजना के तहत डालमिया भारत रिफ्रैक्टरीज के साथ मिलकर बिड़ला टायर्स का अधिग्रहण किया था। इस अधिग्रहण के लिए करीब 347 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई थी। अब अधिग्रहण के बाद कंपनी बिड़ला टायर्स के कारोबार को नए सिरे से विस्तार देने पर काम कर रही है। कंपनी की योजना केवल मौजूदा कारोबार को चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में इसे कई गुना बढ़ाने की तैयारी है।
हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल्स के चेयरमैन और मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनुराग चौधरी ने कंपनी की भविष्य की रणनीति को लेकर जानकारी दी है। उनके मुताबिक कंपनी का फोकस अब केवल संचालन को संभालने पर नहीं, बल्कि कारोबार के विस्तार पर है। इसी रणनीति के तहत बिड़ला टायर्स के लिए करीब 3,000 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
बिड़ला टायर्स का मौजूदा राजस्व इस लक्ष्य की तुलना में काफी कम है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का राजस्व करीब 187 करोड़ रुपये रहा था। ऐसे में 3,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का लक्ष्य मौजूदा स्तर से कई गुना बड़ा है। इसे हासिल करने के लिए कंपनी को उत्पादन क्षमता, उत्पाद पोर्टफोलियो, बिक्री नेटवर्क और नए बाजारों पर बड़े स्तर पर काम करना होगा।
कंपनी की रणनीति में प्रीमियम उत्पादों को खास जगह दी गई है। टायर बाजार में प्रीमियम सेगमेंट को अधिक मार्जिन और बेहतर ब्रांड पोजिशनिंग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में बिड़ला टायर्स की कोशिश अधिक वैल्यू वाले उत्पादों के जरिए बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की होगी।
इसके अलावा निर्यात बाजार पर भी कंपनी का फोकस बढ़ाया जाएगा। घरेलू बाजार के साथ विदेशी बाजारों में विस्तार करने से बिड़ला टायर्स के लिए नए ग्राहक और नए राजस्व स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। कंपनी की बड़ी रणनीति में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए टायर विकसित करना भी शामिल है। ईवी बाजार के लगातार विकसित होने के साथ टायर कंपनियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर बनता जा रहा है।
बिड़ला टायर्स कृषि और वाणिज्यिक वाहनों के लिए करीब 400 नए स्टॉक कीपिंग यूनिट यानी SKU पेश करने की तैयारी में है। नए एसकेयू का मतलब है कि कंपनी अलग-अलग जरूरतों और वाहनों के लिए अपने उत्पादों की रेंज को और व्यापक बनाने जा रही है। इससे कंपनी को अलग-अलग ग्राहक वर्गों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही बिड़ला टायर्स पैसेंजर कार रेडियल यानी PCR बाजार में प्रवेश की अपनी योजना को भी आगे बढ़ा रही है। पैसेंजर कार टायर बाजार कंपनी के लिए एक बड़ा नया क्षेत्र हो सकता है। अगर कंपनी इस सेगमेंट में सफलतापूर्वक प्रवेश करती है, तो उसके उत्पाद पोर्टफोलियो और संभावित ग्राहक आधार दोनों का विस्तार हो सकता है।
कंपनी की यह रणनीति ऐसे समय में सामने आई है जब ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में इलेक्ट्रिक वाहनों और प्रीमियम वाहनों का बाजार तेजी से बदल रहा है। ऐसे में टायर कंपनियों के सामने पारंपरिक उत्पादों के साथ नई तकनीक और नए वाहन सेगमेंट की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती भी है। हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल्स इसी बदलते बाजार को बिड़ला टायर्स की ग्रोथ के अवसर के रूप में देख रही है।
अब आने वाले वर्षों में बिड़ला टायर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को जमीन पर उतारना होगी। 187 करोड़ रुपये के मौजूदा राजस्व से 3,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने के लिए कंपनी को नए उत्पाद, निर्यात, प्रीमियम सेगमेंट, ईवी टायर और पैसेंजर कार रेडियल बाजार में मजबूत प्रदर्शन करना होगा। अगर कंपनी अपनी योजना को सफलतापूर्वक लागू करती है, तो बिड़ला टायर्स के कारोबार का आकार और बाजार में उसकी स्थिति दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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