Sunday, August 23, 2026
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105 साल के कैदी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, उम्रकैद की सजा के बाद अब जेल से हमेशा के लिए रिहाई

सुप्रीम कोर्ट से 105 साल के एक बुजुर्ग कैदी को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उसकी अत्यधिक उम्र को देखते हुए उम्रकैद की बची हुई सजा खत्म कर दी और उसे जेल से स्थायी रूप से रिहा करने का फैसला सुनाया। बुजुर्ग कैदी को करीब तीन दशक पुराने हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा मिली थी।

जानकारी के मुताबिक, बुजुर्ग कैदी को 1994 में एक हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था और अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद उसने लंबे समय तक जेल में रहकर अपनी सजा काटी। उम्र बढ़ने के साथ उसकी रिहाई का मामला अदालत तक पहुंचा।

बुजुर्ग कैदी ने अपनी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए समय से पहले रिहाई की मांग की थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी उसे अंतरिम राहत देते हुए जेल से बाहर रहने की अनुमति दी थी। अब अदालत ने इस राहत को स्थायी कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कैदी की उम्र को महत्वपूर्ण आधार माना। अदालत के सामने यह सवाल था कि 105 साल की उम्र में उसे दोबारा जेल भेजने का क्या औचित्य होगा। उसकी अत्यधिक उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने बची हुई उम्रकैद की सजा खत्म करने का फैसला किया।

अदालत के इस फैसले के बाद अब बुजुर्ग कैदी को दोबारा जेल नहीं जाना पड़ेगा। वह अपनी जिंदगी के बाकी दिन परिवार के साथ स्वतंत्र रूप से बिता सकेगा। हालांकि, अदालत ने उसे हत्या के मामले में निर्दोष घोषित नहीं किया है। उसकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को रद्द करने के बजाय अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए बची हुई सजा को खत्म किया है।

यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि उम्रकैद की सजा के बावजूद अदालत ने मानवीय पहलू को ध्यान में रखा। 105 वर्ष की उम्र में किसी व्यक्ति को जेल में रखना और उसे दोबारा जेल भेजना कितना उचित है, इस पहलू पर अदालत ने विचार किया।

बुजुर्ग कैदी की ओर से लंबे समय से कानूनी राहत की कोशिश की जा रही थी। पहले निचली अदालत और हाईकोर्ट के स्तर पर मामले में राहत नहीं मिली थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए अब मामले को अंतिम रूप से राहत के साथ समाप्त कर दिया।

करीब तीन दशक पुराने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब बुजुर्ग कैदी के लिए जेल वापसी का रास्ता बंद हो गया है। 105 साल की उम्र में मिली यह राहत उसके जीवन के अंतिम पड़ाव में परिवार के साथ रहने का अवसर देगी।

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