अयोध्या में 2 सितंबर 2026 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक हुई, जिसमें तीन नए सदस्यों को ट्रस्टी बनाया गया। इनमें अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय का नाम खास तौर पर चर्चा में है। इसकी वजह यह है कि मदन मोहन पांडेय लंबे समय तक रामलला की ओर से राम जन्मभूमि मामले में अदालत में कानूनी पैरवी करते रहे हैं। अब अदालत की लड़ाई में रामलला का पक्ष रखने वाले पांडेय मंदिर के प्रबंधन से जुड़ी संस्था का हिस्सा बन गए हैं।
मदन मोहन पांडेय अयोध्या के रहने वाले हैं और पेशे से वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की लंबी कानूनी प्रक्रिया में वह रामलला की ओर से पैरवी करने वाली टीम के प्रमुख वकीलों में शामिल रहे। उन्होंने फैजाबाद की अदालत से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक राम मंदिर से जुड़े मामलों में कानूनी पक्ष रखा।
राम जन्मभूमि विवाद की सुनवाई के दौरान पांडेय ने ऐतिहासिक दस्तावेजों, धार्मिक ग्रंथों, पुरातात्विक प्रमाणों और गवाहियों से जुड़े तथ्यों को अदालत के सामने रखने में भूमिका निभाई। मंदिर पक्ष की ओर से पेश किए गए अलग-अलग साक्ष्यों और कानूनी तर्कों को अदालत तक पहुंचाने में भी उनका योगदान रहा। यही वजह है कि राम जन्मभूमि की कानूनी लड़ाई में उनका नाम लंबे समय से जुड़ा रहा है।
साल 2019 में जब सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया और विवादित भूमि रामलला विराजमान के पक्ष में देने का निर्णय किया, तब रामलला की ओर से मुकदमे में पैरवी करने वाले वकीलों का सम्मान भी किया गया था। मदन मोहन पांडेय को भी उस दौरान सम्मानित किया गया था।
राम जन्मभूमि मामले के अलावा मदन मोहन पांडेय का कानूनी अनुभव उत्तर प्रदेश सरकार के साथ भी रहा है। उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में उत्तर प्रदेश के अपर महाधिवक्ता की जिम्मेदारी भी मिली थी। लंबे कानूनी अनुभव और अयोध्या से पुराने जुड़ाव के कारण ट्रस्ट में उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2 सितंबर की बैठक में मदन मोहन पांडेय के अलावा महेश भागचंदका और डॉ. निर्मला यादव को भी नए ट्रस्टी के तौर पर शामिल किया गया। ट्रस्ट में ये नियुक्तियां खाली हुए पदों को भरने के लिए की गई हैं। इसी बैठक में ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए।
मदन मोहन पांडेय ने ट्रस्ट में शामिल होने के बाद कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, वह उसे सेवा भाव से निभाएंगे। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के सभी सदस्यों की संयुक्त जिम्मेदारी होती है और उन्हें जो दायित्व मिलेगा, उसका पूरी तरह निर्वहन करेंगे।
मदन मोहन पांडेय की नियुक्ति इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि राम जन्मभूमि की कानूनी लड़ाई में उनका सफर काफी लंबा रहा है। जिस मामले में उन्होंने वर्षों तक रामलला की ओर से अदालत में पैरवी की, अब उसी राम मंदिर की व्यवस्था और प्रबंधन से जुड़े ट्रस्ट में उन्हें जिम्मेदारी मिली है।
यानी मदन मोहन पांडेय का सफर अदालत में रामलला की कानूनी लड़ाई से शुरू होकर अब राम मंदिर ट्रस्ट तक पहुंच गया है। आने वाले समय में ट्रस्ट में उनकी कानूनी समझ, अयोध्या से उनका जुड़ाव और लंबे अनुभव की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
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