भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। भारती एयरटेल और रिलायंस जियो की ओर से वोडाफोन आइडिया की कुछ कथित प्रचार गतिविधियों को लेकर आपत्ति जताई गई है। आरोप है कि कंपनी दूसरे नेटवर्क से अपना मोबाइल नंबर वोडाफोन आइडिया में पोर्ट कराने वाले ग्राहकों को विशेष शुल्क लाभ या ऑफर देने के जरिए आकर्षित कर रही थी। मामला अब दूरसंचार नियामक ट्राई यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सामने पहुंच गया है।
इस पूरे विवाद के बीच ट्राई के अध्यक्ष ए.के. लाहोटी ने कहा है कि नियामक के पास टेलीकॉम कंपनियों की ओर से जो भी शिकायतें और चिंताएं आती हैं, उनकी समीक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि कंपनियों ने एक-दूसरे के खिलाफ कुछ मुद्दे उठाए हैं और ट्राई को मिले मामलों को देखा जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि इस विशेष मामले में तीनों कंपनियों को आमने-सामने चर्चा के लिए बुलाया जाएगा या उनसे अतिरिक्त जानकारी मांगी जाएगी।
मामले की जड़ वोडाफोन आइडिया के कथित ग्राहक संपर्क और प्रचार अभियानों से जुड़ी बताई जा रही है। शिकायत में दावा किया गया है कि दूसरे मोबाइल नेटवर्क से अपना नंबर पोर्ट कराकर वोडाफोन आइडिया में आने वाले ग्राहकों के लिए कुछ विशेष शुल्क लाभ की पेशकश की गई। शिकायत करने वाली कंपनी का तर्क है कि इस तरह का अलग लाभ ग्राहकों को उनका मौजूदा नेटवर्क छोड़कर दूसरे नेटवर्क पर जाने के लिए प्रोत्साहित करने जैसा हो सकता है।
यही वजह है कि शिकायतकर्ता कंपनी ने ट्राई से इस तरह की प्रचार सामग्री और गतिविधियों को रोकने की मांग की है। साथ ही, कथित तौर पर ऐसे विज्ञापनों, प्रचार अभियानों और बिक्री गतिविधियों को वापस लेने की पुष्टि करने वाली अनुपालन रिपोर्ट जमा कराने की मांग भी की गई है। अब ट्राई की समीक्षा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित ऑफर और प्रचार गतिविधियां मौजूदा नियमों के अनुरूप थीं या नहीं।
दरअसल, भारत के टेलीकॉम बाजार में ग्राहकों को अपने नेटवर्क से जोड़ने की प्रतिस्पर्धा लगातार बनी हुई है। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की सुविधा के कारण ग्राहक अपना मोबाइल नंबर बदले बिना एक टेलीकॉम कंपनी से दूसरी कंपनी में जा सकते हैं। ऐसे में कंपनियां नए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग प्लान, डिस्काउंट और प्रमोशनल ऑफर पेश करती हैं। लेकिन जब किसी खास नेटवर्क से पोर्ट होकर आने वाले ग्राहकों को अलग से फायदा दिया जाता है, तो मामला प्रतिस्पर्धा और नियामकीय नियमों के नजरिए से महत्वपूर्ण हो जाता है।
वोडाफोन आइडिया ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि कंपनी निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, अपने उत्पादों की मजबूती और ग्राहकों को दिए जाने वाले मूल्य में विश्वास करती है। कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक वोडाफोन आइडिया हमेशा कानून के मुताबिक अपना कारोबार करती है। वहीं एयरटेल और जियो की तरफ से इस मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी।
अब सभी की नजर ट्राई की समीक्षा पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि वोडाफोन आइडिया की कथित प्रचार गतिविधियां टेलीकॉम नियमों के दायरे में आती हैं या नहीं। अगर नियामक को किसी नियम का उल्लंघन मिलता है, तो आगे की कार्रवाई उसी आधार पर तय की जा सकती है। फिलहाल जांच और समीक्षा के बाद आने वाले निष्कर्ष का इंतजार है, क्योंकि ट्राई का फैसला टेलीकॉम कंपनियों की ग्राहक जोड़ने वाली रणनीतियों और बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है।
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