महाराष्ट्र सरकार में मंत्री छगन भुजबल को कलिना लाइब्रेरी से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। विशेष अदालत ने गुरुवार को उन्हें इस मामले में बरी कर दिया। इसके साथ ही उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से जुड़े लंबे समय से चल रहे मामलों को लेकर भी बड़ी राहत मिली है। करीब एक दशक से अधिक समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के बाद आया यह फैसला भुजबल के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कलिना लाइब्रेरी मामला मुंबई विश्वविद्यालय की जमीन से जुड़ा था। आरोप था कि विश्वविद्यालय की जमीन का इस्तेमाल केंद्रीय पुस्तकालय के निर्माण के लिए किया जाना था, लेकिन जमीन के एक हिस्से को एक निजी डेवलपर को 99 साल की लीज पर दिया गया। जांच के दौरान आरोप लगाए गए थे कि इस पूरी प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ और सरकारी जमीन के इस्तेमाल में अनियमितता बरती गई।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस मामले में वर्ष 2015 के आसपास जांच और मामला दर्ज किया था। जांच एजेंसी की ओर से यह आरोप लगाया गया था कि जमीन से जुड़े फैसलों में पद का दुरुपयोग किया गया और इससे निजी पक्ष को लाभ पहुंचा। मामले में आर्थिक अनियमितता और कथित अवैध लेन-देन से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे।
छगन भुजबल ने इन आरोपों से इनकार किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और आरोपों पर विचार किया गया। विशेष अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह माना कि भुजबल के खिलाफ अपराध से हुई आय या किसी अवैध आर्थिक लाभ और लेन-देन को पर्याप्त रूप से स्थापित करने वाला आधार नहीं बनता।
अदालत के फैसले के बाद भुजबल को इस मामले में बरी कर दिया गया। यह मामला उनके लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि यह उनके मंत्री पद के दौरान लिए गए फैसलों और सार्वजनिक जमीन के इस्तेमाल से संबंधित था। लगभग दस वर्षों तक चली जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद अब उन्हें इस मामले में राहत मिली है।
कलिना लाइब्रेरी मामले के अलावा भी भुजबल के खिलाफ उनके राजनीतिक और मंत्री पद के कार्यकाल से जुड़े कई कानूनी मामले सामने आए थे। अलग-अलग मामलों में उन्हें पहले भी न्यायिक राहत मिल चुकी है। ताजा फैसले के बाद उनके खिलाफ लंबित भ्रष्टाचार संबंधी मामलों को लेकर स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।
इस मामले में अदालत के फैसले का मुख्य आधार यही रहा कि अभियोजन पक्ष उपलब्ध सामग्री के आधार पर कथित अवैध आर्थिक लाभ या आपराधिक लेन-देन को पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं कर सका। हालांकि, मामले से जुड़े विस्तृत न्यायिक आदेश में अदालत के तर्क और साक्ष्यों के मूल्यांकन की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
करीब एक दशक से चली आ रही इस कानूनी लड़ाई के बाद छगन भुजबल को मिली राहत महाराष्ट्र की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गई है। फिलहाल अदालत के फैसले के साथ कलिना लाइब्रेरी से जुड़े इस मामले में भुजबल के खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही समाप्त हो गई है।
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