लखनऊ: उत्तर प्रदेश में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) समेत विपक्षी दलों पर निशाना साधा। रविवार को लखनऊ में प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने SIR को लेकर विपक्ष के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और चुनाव परिणामों के बाद EVM तथा निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) पर सवाल उठाने की राजनीति पर भी प्रतिक्रिया दी।
SIR को लेकर विपक्ष के विरोध पर क्या बोले CM योगी?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस, सपा और आरजेडी की ओर से SIR को लेकर जिस तरह का विरोध और सवाल उठाए जा रहे हैं, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने विपक्षी दलों के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर राजनीतिक दलों को तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।
SIR यानी Special Intensive Revision of Electoral Rolls मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। निर्वाचन आयोग के अनुसार इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
‘चुनाव जीतें तो पुरुषार्थ, हारें तो EVM पर सवाल’
सीएम योगी ने चुनावी परिणामों को लेकर विपक्षी दलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब विपक्षी दल चुनाव जीतते हैं तो इसे अपना पुरुषार्थ बताते हैं, लेकिन जब जनता उन्हें नकार देती है तो EVM और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जाते हैं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, राजनीतिक दलों को चुनाव परिणामों की समीक्षा करते समय अपने प्रदर्शन और जनता के बीच अपनी स्थिति का भी आत्मावलोकन करना चाहिए। उन्होंने चुनावी हार के बाद निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाने के रवैये को लेकर विपक्ष से सवाल किया।
चुनाव आयोग के बचाव में उतरे मुख्यमंत्री
SIR को लेकर विपक्ष की ओर से निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव आयोग का बचाव किया। उन्होंने विपक्षी दलों पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर लगातार सवाल खड़े करने का आरोप लगाया।
इससे पहले भी मुख्यमंत्री ने SIR को लेकर विपक्ष की आलोचना की थी और कहा था कि इस तरह की पुनरीक्षण प्रक्रिया पहले भी होती रही है। 27 सितंबर की रिपोर्टिंग में उनके हवाले से 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में हुए पूर्व SIR अभ्यासों का उल्लेख किया गया।
SIR पर विपक्ष की क्या आपत्तियां हैं?
SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से प्रक्रिया की पारदर्शिता, निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने 26 सितंबर को SIR प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता की मांग की थी।
इस तरह SIR का मुद्दा अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण का क्या है उद्देश्य?
निर्वाचन आयोग के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार SIR का प्रमुख उद्देश्य पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और अपात्र व्यक्तियों को सूची में शामिल होने से रोकना है। आयोग ने SIR-2026 से संबंधित मतदाता सेवाओं के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी उपलब्ध कराया है, जहां मतदाता अपना नाम और संबंधित चुनावी जानकारी देख सकते हैं।
EVM और चुनाव आयोग पर बहस के बीच बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेस वार्ता के बाद SIR, मतदाता सूची, EVM और निर्वाचन आयोग को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ने जहां विपक्ष के विरोध को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा, वहीं विपक्षी दल SIR प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं।
ऐसे में SIR को लेकर आगे होने वाली राजनीतिक और संस्थागत चर्चाओं में मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाताओं के अधिकार, प्रक्रिया की पारदर्शिता और निर्वाचन व्यवस्था में भरोसा प्रमुख मुद्दे बने रह सकते हैं।
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