उत्तर प्रदेश के हापुड़ से मिलावटखोरी के एक चौंकाने वाले मामले का खुलासा हुआ है। हाफिजपुर थाना क्षेत्र में खेतों के बीच चल रही एक कथित अवैध फैक्ट्री पर कृषि विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में सरकारी अनुदानित यूरिया बरामद की गई। आरोप है कि इस यूरिया को मशीनों में पीसकर मुर्गी के दाने में मिलाया जा रहा था।
मामला सामने आने के बाद इलाके में भी हड़कंप मच गया। खेतों के बीच चल रही इस फैक्ट्री में जिस तरह सरकारी यूरिया का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल मौजूद रहा और फैक्ट्री परिसर की तलाशी ली गई।
जानकारी के मुताबिक, कृषि विभाग और पुलिस की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध फैक्ट्री पर छापा मारा। टीम ने मौके से तीन युवकों को कथित तौर पर यूरिया पीसते हुए पकड़ा। आरोप है कि मशीनों की मदद से सरकारी यूरिया को बारीक किया जा रहा था और फिर इसे मुर्गी दाने में मिलाने का काम किया जा रहा था।
छापेमारी के दौरान फैक्ट्री परिसर से सरकारी यूरिया के 184 कट्टे बरामद किए गए। इतनी बड़ी मात्रा में यूरिया मिलने के बाद अधिकारियों ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि बरामद यूरिया सरकारी अनुदानित थी, जिसे किसानों के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
अब जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि आखिर यह यूरिया फैक्ट्री तक कैसे पहुंची। किसानों के लिए निर्धारित सरकारी अनुदानित यूरिया की सप्लाई व्यवस्था में कहीं कोई गड़बड़ी हुई थी या फिर इसे किसी अन्य माध्यम से अवैध तरीके से यहां लाया गया, इसकी जांच की जा रही है।
इस मामले में कामिल नाम के एक व्यक्ति का नाम भी सामने आया है। शुरुआती जांच के अनुसार, कथित तौर पर इसी व्यक्ति द्वारा फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा था। पुलिस और कृषि विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि कामिल की भूमिका क्या थी और इस कथित अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोग कौन-कौन हैं।
मौके से पकड़े गए तीन युवकों से भी पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों की कोशिश है कि पूछताछ के जरिए इस पूरे नेटवर्क की जानकारी हासिल की जा सके। यह भी पता लगाया जा सकता है कि कथित तौर पर तैयार किया जा रहा मिलावटी मुर्गी दाना कहां सप्लाई किया जाता था और इस कारोबार में कितने लोग शामिल थे।
जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रकाश के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बाद फैक्ट्री को सीज कर दिया गया है। कृषि विभाग की तहरीर पर हाफिजपुर थाने में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस अब बरामद सामग्री, मशीनों और फैक्ट्री में मौजूद अन्य सामान की भी जांच कर रही है।
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस यूरिया को किसानों के लिए सरकारी सहायता के तहत उपलब्ध कराया जाता है, उसके कथित अवैध इस्तेमाल का आरोप सामने आया है। वहीं, अगर यूरिया को वास्तव में मुर्गी दाने में मिलाकर बाजार में भेजा जा रहा था, तो इसकी सप्लाई और इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
फिलहाल तीन आरोपियों को पकड़कर पूछताछ की जा रही है और कथित मास्टरमाइंड कामिल की भूमिका को लेकर भी जांच आगे बढ़ रही है। पुलिस और कृषि विभाग की कार्रवाई के बाद अब यह सामने आना बाकी है कि इस कथित कारोबार का नेटवर्क कितना बड़ा था, सरकारी यूरिया कहां से पहुंची और तैयार माल की सप्लाई कहां तक की गई।
हापुड़ में खेतों के बीच चल रही इस कथित अवैध फैक्ट्री पर हुई कार्रवाई ने मिलावटखोरी के इस पूरे खेल को सामने ला दिया है। अब जांच आगे बढ़ने के साथ कई और नाम और तथ्य सामने आने की संभावना है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ जारी है।
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