Lucknow News: लखनऊ के जानकीपुरम स्थित जयति भारतम् परिसर में जयति भारतम् और इनेबल इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘सॉल्यूशन वीक’ कार्यक्रम का समापन हुआ। ‘सी अ मिलियन’ (See A Million) अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में दृष्टिबाधित एवं कम दृष्टि वाले व्यक्तियों के डिजिटल सशक्तिकरण, समावेशी शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर जोर दिया गया। अभियान का लक्ष्य देशभर में 10 लाख दृष्टिबाधित व्यक्तियों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।
कार्यक्रम में दृष्टि दिव्यांग विद्यार्थी, उनके अभिभावक, सामान्य विद्यालयों के छात्र-छात्राएं, शिक्षक और विभिन्न सामाजिक एवं व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में 600 से अधिक लोगों ने सहभागिता की। आयोजन के दौरान आधुनिक सहायक डिजिटल उपकरणों और तकनीकों के माध्यम से दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए शिक्षा, डिजिटल सेवाओं और रोजगार तक पहुंच आसान बनाने के तरीकों की जानकारी साझा की गई।
लखनऊ में डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने की पहल
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के सभापति डॉ. विवेक सिंह तोमर और जयति भारतम् की सचिव रंजना अग्निहोत्री ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए उपयोगी आधुनिक डिजिटल उपकरणों और सहायक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
इन तकनीकों का उद्देश्य दृष्टिबाधित एवं कम दृष्टि वाले लोगों को कंप्यूटर और लैपटॉप के उपयोग, डिजिटल अध्ययन सामग्री तक पहुंच तथा ऑनलाइन सेवाओं के स्वतंत्र इस्तेमाल में सहायता प्रदान करना है। इस प्रकार की पहल दिव्यांगजनों के लिए तकनीकी सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाने और समाज में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या है ‘सी अ मिलियन’ अभियान?
जयति भारतम् की सचिव रंजना अग्निहोत्री ने बताया कि ‘सी अ मिलियन’ अभियान दृष्टिबाधित और कम दृष्टि वाले व्यक्तियों के डिजिटल सशक्तिकरण पर केंद्रित है। इसका लक्ष्य देशभर में 10 लाख यानी एक मिलियन दृष्टिबाधित व्यक्तियों को डिजिटल साक्षरता से जोड़ना है, जिससे वे तकनीक का इस्तेमाल कर अपने शैक्षणिक, व्यक्तिगत और व्यावसायिक कार्य अधिक स्वतंत्रता से कर सकें।
डिजिटल साक्षरता के माध्यम से दृष्टिबाधित व्यक्तियों को शिक्षा, सूचना, संचार और वित्तीय सेवाओं तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज की मुख्यधारा में उनकी सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना भी है।
स्क्रीन रीडर और मैग्नीफायर से मिलेगी डिजिटल शिक्षा में मदद
जयति भारतम् की चीफ फंक्शनरी डॉ. रेनू अग्निहोत्री ने अभियान के अंतर्गत संचालित प्रशिक्षण गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्क्रीन रीडर और मैग्नीफायर जैसे सहायक तकनीकी टूल्स की मदद से दृष्टिबाधित एवं कम दृष्टि वाले व्यक्ति कंप्यूटर और लैपटॉप का प्रभावी ढंग से उपयोग करना सीख सकते हैं।
अभियान के तहत निम्नलिखित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:
- डिजिटल साक्षरता: स्क्रीन रीडर और मैग्नीफायर की मदद से कंप्यूटर एवं लैपटॉप चलाने का प्रशिक्षण।
- उच्च शिक्षा: डिजिटल अध्ययन सामग्री तक पहुंच और पढ़ाई के लिए तकनीकी कौशल का विकास।
- स्वतंत्र परीक्षा: आवश्यक तकनीकी सुविधाओं और परीक्षा नियमों के अनुरूप लैपटॉप पर स्वयं परीक्षा देने की क्षमता विकसित करना।
- ऑनलाइन सेवाएं: ई-मेल, मैसेजिंग और ऑनलाइन बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाओं का स्वतंत्र उपयोग।
- रोजगार के अवसर: दृष्टिबाधित व्यक्तियों को तकनीकी प्रशिक्षण देकर प्रशिक्षक के रूप में विकसित करना, ताकि वे अन्य लोगों को भी प्रशिक्षित कर सकें।
इन प्रयासों के जरिए दृष्टिबाधित व्यक्तियों को तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय उसका स्वतंत्र रूप से उपयोग करने और अपने कौशल को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए शिक्षा और रोजगार के नए अवसर
कार्यक्रम में विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों की भागीदारी ने समावेशी शिक्षा और डिजिटल पहुंच के महत्व को सामने रखा। सहायक तकनीकों की उपलब्धता से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री पढ़ने, ऑनलाइन जानकारी प्राप्त करने और शैक्षणिक गतिविधियों में स्वतंत्र रूप से भाग लेने में मदद मिल सकती है।
वहीं, डिजिटल कौशल और तकनीकी प्रशिक्षण से रोजगार की संभावनाओं को बढ़ावा मिल सकता है। अभियान में दृष्टिबाधित व्यक्तियों को प्रशिक्षक के रूप में तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि वे अपने अनुभव और कौशल के माध्यम से अन्य जरूरतमंद लोगों को डिजिटल रूप से सशक्त बना सकें।
600 से अधिक लोगों ने कार्यक्रम में लिया हिस्सा
कार्यक्रम जयति भारतम् की डॉ. रेनू अग्निहोत्री (चीफ फंक्शनरी) के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। आयोजन के समन्वय में कोऑर्डिनेटर श्रीमती अभिलाषा अग्निहोत्री की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस अवसर पर जन उद्घोष व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र प्रताप सिंह, प्रदेश महामंत्री विनोद सिंह, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुशील कुमार सिंह, प्रदेश महामंत्री आर.के. सिंह चौहान, महानगर लखनऊ अध्यक्ष विपिन सिंह और जानकीपुरम महामंत्री रोहित कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में 600 से अधिक लोगों ने सहभागिता की। ‘सॉल्यूशन वीक’ के समापन पर डिजिटल समावेशन, सुलभ तकनीक और समान अवसरों के महत्व को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम का व्यापक संदेश रहा कि सही प्रशिक्षण, आधुनिक सहायक उपकरण और सामाजिक सहयोग के माध्यम से दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खोले जा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. लखनऊ में ‘सॉल्यूशन वीक’ कार्यक्रम का आयोजन कहां हुआ?
कार्यक्रम का आयोजन लखनऊ के जानकीपुरम स्थित जयति भारतम् परिसर में किया गया।
2. ‘सी अ मिलियन’ अभियान का उद्देश्य क्या है?
इस अभियान का लक्ष्य देशभर में 10 लाख दृष्टिबाधित एवं कम दृष्टि वाले व्यक्तियों को डिजिटल रूप से साक्षर और सशक्त बनाना है।
3. स्क्रीन रीडर और मैग्नीफायर क्या हैं?
स्क्रीन रीडर स्क्रीन पर मौजूद सामग्री को आवाज के माध्यम से समझने में मदद करता है, जबकि मैग्नीफायर स्क्रीन पर लिखे अक्षरों और अन्य सामग्री को बड़ा करके देखने में सहायता करता है।
4. डिजिटल प्रशिक्षण से दृष्टिबाधित व्यक्तियों को क्या लाभ मिल सकता है?
डिजिटल प्रशिक्षण से उन्हें पढ़ाई, ऑनलाइन सेवाओं, संचार और रोजगार संबंधी गतिविधियों में अधिक स्वतंत्रता प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
5. कार्यक्रम में कितने लोगों ने भाग लिया?
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में 600 से अधिक लोगों ने सहभागिता की।
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