कार्डियक अरेस्ट यानी दिल का अचानक काम करना बंद कर देना एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है,जिसमें कुछ ही मिनटों के भीतर मरीज की जान खतरे में पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में समय पर मदद मिलना बेहद जरूरी होता है। अगर आसपास मौजूद व्यक्ति तुरंत सही कदम उठाए,तो मरीज के बचने की संभावना बढ़ सकती है। इसी वजह से डॉक्टर कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन यानी सीपीआर को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। अब इस प्रक्रिया को बेहतर बनाने और लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की भूमिका पर भी चर्चा हो रही है। एम्स दिल्ली के डॉक्टरों ने कार्डियक अरेस्ट के दौरान सीपीआर की अहमियत और आम लोगों को इसकी ट्रेनिंग देने की जरूरत पर जोर दिया है।
कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में दिल अचानक प्रभावी तरीके से खून पंप करना बंद कर देता है। इससे मस्तिष्क और शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचना रुक सकता है। ऐसे में व्यक्ति अचानक बेहोश होकर गिर सकता है और उसकी सामान्य सांस बंद हो सकती है या सांस असामान्य तरीके से चल सकती है। यदि तत्काल सहायता नहीं मिलती,तो कुछ ही मिनटों में गंभीर नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसी स्थिति में सीपीआर एक महत्वपूर्ण प्राथमिक जीवनरक्षक प्रक्रिया है। सीपीआर के दौरान छाती के बीच में दबाव देकर शरीर में खून का प्रवाह बनाए रखने की कोशिश की जाती है। इससे मस्तिष्क और अन्य जरूरी अंगों तक कुछ मात्रा में ऑक्सीजनयुक्त रक्त पहुंचता रह सकता है,जब तक कि प्रशिक्षित चिकित्सा सहायता उपलब्ध न हो जाए। सीपीआर दिल की सामान्य धड़कन को अपने आप बहाल करने की गारंटी नहीं देता,लेकिन कार्डियक अरेस्ट के मरीज को बचाने की कोशिश में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
डॉक्टरों के मुताबिक,कार्डियक अरेस्ट में समय की बहुत अहम भूमिका होती है। मरीज को अस्पताल पहुंचाने तक इंतजार करना कई बार खतरनाक हो सकता है। इसलिए आसपास मौजूद लोगों को स्थिति पहचानने और तुरंत मदद बुलाने की जानकारी होनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए और प्रतिक्रिया न दे,तो उसकी सामान्य सांस की जांच करते हुए तुरंत आपातकालीन सेवा को फोन करना चाहिए। अगर व्यक्ति सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है या केवल हांफ रहा है,तो कार्डियक अरेस्ट की आशंका मानकर तत्काल कार्रवाई करना जरूरी है।
अगर आप भारत में ऐसी स्थिति का सामना करते हैं,तो 112 पर आपातकालीन सहायता के लिए संपर्क कर सकते हैं। फोन करने के बाद ऑपरेटर के निर्देशों का पालन करें। यदि व्यक्ति बेहोश है और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा,तो छाती के बीच में जोर से और तेजी से दबाव देना शुरू करें। वयस्कों में सीपीआर के दौरान छाती को प्रति मिनट लगभग 100 से 120 बार दबाने की सलाह दी जाती है। दबाव की गहराई लगभग 5 से 6 सेंटीमीटर होनी चाहिए और हर दबाव के बाद छाती को वापस सामान्य स्थिति में आने देना चाहिए।
यदि आपने सीपीआर की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली है,तो भी आपातकालीन सेवा के फोन ऑपरेटर के निर्देशों के अनुसार छाती पर दबाव देकर मदद कर सकते हैं। यदि आसपास ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर यानी एईडी उपलब्ध है,तो उसे मंगवाएं और उसके आवाज या स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करें। सीपीआर तब तक जारी रखें,जब तक मरीज सामान्य रूप से सांस लेने न लगे,प्रशिक्षित सहायता न पहुंच जाए या आप शारीरिक रूप से जारी रखने में असमर्थ न हो जाएं। यदि व्यक्ति बेहोश है लेकिन सामान्य रूप से सांस ले रहा है,तो सीपीआर शुरू करने के बजाय आपातकालीन सहायता लेकर उसकी सांस पर लगातार नजर रखें।
अब सवाल उठता है कि इस पूरी प्रक्रिया में एआई कैसे मददगार बन सकता है? कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग सीपीआर की ट्रेनिंग,तकनीक में सुधार और आपातकालीन प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर,सीपीआर प्रशिक्षण के दौरान इस्तेमाल होने वाले स्मार्ट उपकरण छाती पर दिए जा रहे दबाव की गति और गहराई को माप सकते हैं। एआई आधारित प्रणाली इन आंकड़ों का विश्लेषण करके प्रशिक्षु को बता सकती है कि दबाव बहुत धीमा है,बहुत तेज है या पर्याप्त गहरा नहीं है।
ऐसी तकनीक से लोगों को अभ्यास के दौरान अपनी गलतियां समझने और सीपीआर की तकनीक सुधारने में मदद मिल सकती है। प्रशिक्षण के दौरान वास्तविक समय में प्रतिक्रिया मिलने से अभ्यास अधिक प्रभावी बन सकता है। हालांकि,हर एआई प्रणाली की क्षमता एक जैसी नहीं होती और उसके परिणाम इस बात पर निर्भर करते हैं कि उपकरण कितना सटीक है तथा उसे किस उद्देश्य से तैयार किया गया है।
एआई का इस्तेमाल आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने में भी संभावित रूप से किया जा सकता है। कुछ प्रणालियां आपातकालीन कॉल के दौरान बातचीत का विश्लेषण करके कार्डियक अरेस्ट के संभावित संकेत पहचानने में सहायता कर सकती हैं। इससे कॉल संभालने वाले व्यक्ति को स्थिति की गंभीरता समझने और सीपीआर के निर्देश जल्दी देने में मदद मिल सकती है। इसी तरह,डिजिटल प्रशिक्षण प्रणाली अधिक लोगों को सीपीआर की जानकारी देने में सहायक हो सकती है।
लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि एआई डॉक्टरों,प्रशिक्षित आपातकालीन कर्मियों या वास्तविक सीपीआर का विकल्प नहीं है। इसका उद्देश्य सहायता और प्रशिक्षण को बेहतर बनाना है। किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट होने पर एआई उपकरण खोजने या किसी ऐप को चालू करने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। सबसे पहले आपातकालीन सेवा को बुलाना और जरूरी जीवनरक्षक कदम शुरू करना महत्वपूर्ण है।
एम्स दिल्ली के डॉक्टरों की ओर से सीपीआर के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिए जाने का संदेश भी यही है कि जीवन बचाने वाली इस प्रक्रिया की जानकारी केवल चिकित्सा पेशेवरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। स्कूलों,कॉलेजों,कार्यालयों,सार्वजनिक स्थलों और सामुदायिक कार्यक्रमों में सीपीआर का प्रशिक्षण अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। अगर आसपास मौजूद लोग सही समय पर सही कदम उठाना सीख लें,तो आपातकालीन स्थिति में मरीज को मदद मिलने में लगने वाला समय कम किया जा सकता है।
कार्डियक अरेस्ट किसी भी समय और किसी भी स्थान पर हो सकता है। इसलिए सीपीआर की जानकारी रखना और जरूरत पड़ने पर आपातकालीन सहायता बुलाना बेहद महत्वपूर्ण है। एआई भविष्य में प्रशिक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है,लेकिन किसी की जान बचाने में सबसे अहम भूमिका समय पर पहचान,तुरंत कार्रवाई और प्रशिक्षित चिकित्सा सहायता की ही रहेगी।
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