Saturday, October 17, 2026
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मुलेठी से एसिडिटी और गले की खराश में मिल सकती है राहत, जानिए इसके फायदे और जरूरी सावधानियां

क्या आप भी पेट में जलन, एसिडिटी, अपच या गले की खराश जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं? आयुर्वेद में मुलेठी का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। इसका उपयोग गले को आराम देने और कुछ पाचन संबंधी परेशानियों में राहत पाने के लिए किया जाता है। इतना ही नहीं, मुलेठी का इस्तेमाल त्वचा की देखभाल में भी किया जाता है। लेकिन क्या मुलेठी वास्तव में वजन घटाने में मदद करती है और क्या इसका सेवन हर किसी के लिए सुरक्षित है? इसे इस्तेमाल करने से पहले इसके फायदे और सावधानियों को जानना जरूरी है।

मुलेठी एक औषधीय पौधे की जड़ है, जिसका स्वाद प्राकृतिक रूप से मीठा होता है। आयुर्वेद में इसे कई पारंपरिक उपचारों में शामिल किया जाता है। हालांकि, किसी भी औषधीय जड़ी-बूटी को हर बीमारी का रामबाण इलाज मानना सही नहीं है। इसका असर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, इस्तेमाल की मात्रा और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों पर निर्भर कर सकता है।

मुलेठी का पहला प्रमुख उपयोग गले की खराश और खांसी से जुड़ी परेशानी में किया जाता है। इसके कुछ घटकों में सूजन कम करने वाले गुण पाए गए हैं। मुलेठी से बने कुछ उत्पाद गले में आराम देने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, लगातार खांसी, तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या लंबे समय तक गले में दर्द रहने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।

एसिडिटी और पेट की जलन की बात करें तो मुलेठी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से पाचन संबंधी समस्याओं में किया जाता रहा है। कुछ विशेष प्रकार की मुलेठी से बने उत्पादों पर सीमित शोध हुआ है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि सामान्य मुलेठी हर व्यक्ति की एसिडिटी ठीक कर सकती है। बार-बार सीने में जलन, खट्टी डकार या पेट दर्द होने पर इसके वास्तविक कारण का पता लगाना जरूरी है। नियमित परेशानी होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना मुलेठी का सेवन शुरू न करें।

मुलेठी को वजन घटाने के उपाय के रूप में भी प्रचारित किया जाता है। लेकिन इस बात के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि मुलेठी खाने से अपने आप वजन कम हो जाता है। वजन नियंत्रित करने के लिए संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और स्वस्थ दिनचर्या अधिक महत्वपूर्ण हैं। मुलेठी को वजन घटाने की दवा समझकर अधिक मात्रा में लेना नुकसानदायक हो सकता है।

त्वचा की देखभाल में भी मुलेठी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके कुछ घटकों पर त्वचा के रंग में असमानता और दाग-धब्बों से जुड़े प्रभावों के लिए शोध किया गया है। हालांकि, घर पर मुलेठी का पाउडर चेहरे पर लगाने से मुंहासे पूरी तरह खत्म हो जाएंगे, इसकी गारंटी नहीं है। यदि आप इसे त्वचा पर इस्तेमाल करना चाहती हैं, तो पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर परीक्षण करें। जलन, लालिमा या खुजली होने पर इसका उपयोग बंद कर दें। गंभीर मुंहासों के लिए त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

बालों के झड़ने को रोकने के लिए भी मुलेठी का इस्तेमाल घरेलू नुस्खों में किया जाता है। लेकिन बालों का झड़ना रोकने में इसकी प्रभावशीलता के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। बाल झड़ने के पीछे पोषण की कमी, हार्मोन संबंधी बदलाव, तनाव या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए लगातार बाल झड़ने पर कारण का पता लगाना ज्यादा जरूरी है।

मुलेठी का सेवन करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। इसमें मौजूद ग्लाइसिराइज़िन नामक तत्व अधिक मात्रा में या लंबे समय तक लेने पर रक्तचाप बढ़ा सकता है, शरीर में पोटैशियम का स्तर कम कर सकता है और हृदय की धड़कन से जुड़ी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। उच्च रक्तचाप, हृदय या गुर्दे की बीमारी से पीड़ित लोगों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

इसलिए मुलेठी को प्राकृतिक होने के कारण पूरी तरह सुरक्षित मानना सही नहीं है। गले की सामान्य परेशानी में कुछ लोगों को इससे राहत मिल सकती है, लेकिन एसिडिटी, वजन घटाने, मुंहासों या बालों के झड़ने के इलाज के रूप में इसके लाभ सीमित हैं। किसी भी समस्या के लिए इसका नियमित सेवन करने से पहले चिकित्सक से सलाह लें और संतुलित जीवनशैली को प्राथमिकता दें।

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