जापान के आइची-नागोया में पांचवें एशियाई पैरा खेलों का आगाज हो गया है। 18 से 24 अक्टूबर तक चलने वाले इस बड़े खेल आयोजन में एशिया के विभिन्न देशों के पैरा खिलाड़ी अपनी प्रतिभा और दमखम दिखाएंगे। इस बार प्रतियोगिता में 45 देशों के लगभग 3,000 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं और मुकाबले 18 खेलों में आयोजित किए जाएंगे। भारतीय दल भी पूरे उत्साह के साथ मैदान में उतरने के लिए तैयार है। देश की नजरें एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए पदकों की संख्या बढ़ाने पर टिकी हैं।
इन खेलों का उद्घाटन समारोह जापान के नागोया स्थित पालोमा मिजुहो स्टेडियम में आयोजित किया जा रहा है। समारोह की मुख्य विषयवस्तु ‘वाबी: वी आर ब्यूटीफुल इंडिविजुअल्स’ रखी गई है। इसका संदेश हर व्यक्ति की अलग पहचान और खूबसूरती का सम्मान करना है। इन खेलों के जरिए एशिया के दिव्यांग खिलाड़ी अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और खेल के प्रति समर्पण का प्रदर्शन करेंगे।
उद्घाटन समारोह से पहले ही कुछ खेलों के मुकाबले शुरू हो गए हैं। इनमें नेत्रहीन फुटबॉल, पैरा बैडमिंटन, पैरा टेबल टेनिस और बोच्चिया शामिल हैं। इन प्रतियोगिताओं में खिलाड़ी पदक जीतने के साथ अपनी टीमों को अच्छी शुरुआत दिलाने की कोशिश करेंगे।
भारत की ओर से पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी प्रमोद भगत और धाविका सिमरन शर्मा भारतीय दल के ध्वजवाहक होंगे। दोनों खिलाड़ी उद्घाटन समारोह में तिरंगे के साथ भारतीय दल का नेतृत्व करेंगे। पहले इस जिम्मेदारी के लिए पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी भाविना पटेल का नाम तय किया गया था, लेकिन उनके क्वार्टर फाइनल मुकाबले को देखते हुए उन्हें आराम देने का फैसला किया गया। इसके बाद सिमरन शर्मा को ध्वजवाहक बनाया गया।
भारत ने इन खेलों के लिए 281 सदस्यों का दल भेजा है। इसमें 168 खिलाड़ी और 113 अधिकारी व सहयोगी कर्मचारी शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ियों में 112 पुरुष और 56 महिलाएं हैं, जो 11 खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। दल में भाला फेंक खिलाड़ी सुमित अंतिल, पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी प्रमोद भगत, पैरा निशानेबाज अवनी लेखरा, पैरा तीरंदाज शीतल देवी, धाविका सिमरन शर्मा और पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी भाविना पटेल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
भारत के लिए पिछला एशियाई पैरा खेल बेहद सफल रहा था। वर्ष 2023 में चीन के हांगझोऊ में आयोजित प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कुल 111 पदक जीते थे। इनमें 29 स्वर्ण, 31 रजत और 51 कांस्य पदक शामिल थे। इस शानदार प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में पांचवें स्थान पर रहा था। इससे पहले वर्ष 2018 में जकार्ता में भारत ने 72 पदक जीते थे।
पिछले संस्करण में मिली सफलता ने भारतीय पैरा खेलों को नई पहचान दिलाई थी। अब भारतीय खिलाड़ी एक बार फिर एशिया के मजबूत खिलाड़ियों के सामने चुनौती पेश करने उतरेंगे। एथलेटिक्स, पैरा बैडमिंटन, निशानेबाजी और तीरंदाजी जैसे खेलों में भारत को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। हालांकि, पदक जीतने के लिए भारतीय खिलाड़ियों को दूसरे देशों के मजबूत खिलाड़ियों से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन केवल पदकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश में पैरा खेलों के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों के संघर्ष को भी सामने लाएगा। हर खिलाड़ी अपने खेल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने और देश का नाम रोशन करने के इरादे से मैदान में उतरेगा।
अब सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि क्या भारतीय खिलाड़ी पिछले संस्करण में जीते गए 111 पदकों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ पाएंगे। देशवासियों को उम्मीद है कि भारतीय खिलाड़ी तिरंगे की शान बढ़ाते हुए स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतेंगे और एशिया में भारत की मजबूत खेल पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।
![]()

