चीन ने सुरंग खोदने वाली मशीनों यानी टनल बोरिंग मशीनों और उनसे जुड़े उपकरणों के निर्यात पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। चीन का यह फैसला भारत की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि देश में भूमिगत मेट्रो नेटवर्क, हाई-स्पीड रेल और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरंग निर्माण जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। चीन के वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, नए निर्यात प्रतिबंध 18 नवंबर से लागू होंगे। बीजिंग ने इन कदमों के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा को वजह बताया है। नए नियमों के तहत संबंधित मशीनों और उपकरणों का निर्यात करने वाली कंपनियों को चीन के वाणिज्य मंत्रालय से विशेष लाइसेंस लेना होगा। इसके अलावा, निर्यातकों को नियंत्रित वस्तुओं की पहचान कर सीमा शुल्क संबंधी घोषणाओं में उनके दोहरे उपयोग वाले निर्यात नियंत्रण कोड का उल्लेख भी करना होगा। यानी अब इन मशीनों और तकनीक से जुड़े उपकरणों को विदेश भेजने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त हो सकती है। भारत के लिए यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि सुरंग खोदने वाली टीबीएम मशीनें आधुनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन मशीनों की मदद से जमीन के भीतर लंबी सुरंगें बनाई जाती हैं। खास तौर पर भूमिगत मेट्रो रेल परियोजनाओं, रेलवे सुरंगों और पहाड़ी इलाकों में सड़क तथा रेल संपर्क विकसित करने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है। अगर इन मशीनों की आपूर्ति में देरी होती है या संबंधित उपकरणों के निर्यात में अतिरिक्त मंजूरी की जरूरत पड़ती है, तो कुछ परियोजनाओं की समयसीमा और लागत प्रभावित होने की आशंका हो सकती है। हालांकि, चीन के नए प्रतिबंधों से भारत की किन परियोजनाओं पर कितना असर पड़ेगा, यह उपलब्ध आपूर्ति व्यवस्था, वैकल्पिक स्रोतों और संबंधित मशीनों की जरूरत पर निर्भर करेगा। गौरतलब है कि भारत को टीबीएम मशीनों की आपूर्ति के मामले में पहले भी चीन से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। वर्ष 2024 में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी के वाइस चांसलर के साथ बातचीत के दौरान कहा था कि चीन अपने यहां टीबीएम बनाने वाली एक जर्मन कंपनी को भारत में इन मशीनों के निर्यात की अनुमति नहीं दे रहा है। इससे पहले भी इन मशीनों की उपलब्धता को लेकर चिंता सामने आ चुकी है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय की ताजा घोषणा में केवल सुरंग खोदने वाली मशीनें ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य विशेष मशीनों को भी शामिल किया गया है। इनमें चलने में सक्षम खुदाई मशीनें और ऊंचे पठारी इलाकों में इस्तेमाल होने वाली गीले मिश्रण के छिड़काव की मशीनें शामिल हैं। इसके साथ ही, निर्धारित तकनीकी मानकों को पूरा करने वाले ड्रेजर से संबंधित कुछ उपकरणों के निर्यात नियंत्रण में भी बदलाव किए गए हैं। चीन ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित वस्तुओं के निर्यात पर उसके निर्यात नियंत्रण कानून और दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं से जुड़े नियम लागू होंगे। दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं का मतलब ऐसे उपकरणों या तकनीकों से है, जिनका इस्तेमाल नागरिक कार्यों के साथ-साथ कुछ परिस्थितियों में सैन्य या रणनीतिक उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है। चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, जिन वस्तुओं पर सीधे तौर पर निर्यात नियंत्रण लागू नहीं है, लेकिन जिनकी तकनीकी विशेषताएं या प्रदर्शन नियंत्रित वस्तुओं के समान हैं, उनके निर्यातकों को भी अपनी घोषणा के समर्थन में विस्तृत तकनीकी जानकारी देनी होगी। चीन का यह कदम ऐसे समय आया है, जब वह अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों के निर्यात पर भी नियंत्रण बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहा है। इससे पहले शुक्रवार को चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कृत्रिम मेधा यानी एआई, जैव प्रौद्योगिकी और सौर ऊर्जा समेत विभिन्न क्षेत्रों की 14 प्रौद्योगिकियों के निर्यात पर नए प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पेश किया था। इन प्रस्तावों का वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा और चीन की तकनीक पर निर्भर देशों पर असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर, टीबीएम मशीनों और संबंधित उपकरणों पर चीन के नए निर्यात प्रतिबंध भारत के लिए आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण तकनीक की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत को फिर सामने लाते हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन प्रतिबंधों का भारत की परियोजनाओं की लागत, मशीनों की आपूर्ति और निर्माण कार्यों की समयसीमा पर कितना वास्तविक प्रभाव पड़ता है।
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