Tuesday, October 20, 2026
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एशियाई पैरा खेलों में भारत का शानदार प्रदर्शन, देवेंद्र कुमार ने जीता स्वर्ण; चक्का फेंक में तीनों पदक भारत के नाम

जापान के नागोया में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का मान बढ़ाया है। पुरुषों की चक्का फेंक स्पर्धा में भारत ने ऐसा कमाल किया कि स्वर्ण, रजत और कांस्य तीनों पदक भारतीय खिलाड़ियों के खाते में आए। देवेंद्र कुमार ने स्वर्ण पदक जीतकर शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि राकेश ने रजत और प्रदीप कुमार ने कांस्य पदक अपने नाम किया। एक ही स्पर्धा में तीनों पदकों पर भारत का कब्जा पैरा एथलेटिक्स में देश की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।

नागोया सिटी मिजुहो पार्क एथलेटिक्स स्टेडियम में आयोजित इस मुकाबले में देवेंद्र कुमार ने 49.71 मीटर की दूरी तक चक्का फेंककर शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 781 रजा अंक हासिल किए और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। देवेंद्र का सर्वश्रेष्ठ प्रयास दूसरे दौर में आया, जिसने उन्हें प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने भारतीय दल के पदक अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इसी स्पर्धा में भारत के राकेश ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने 49.45 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास दर्ज करते हुए 771 रजा अंक हासिल किए और रजत पदक जीता। वहीं, प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर तक चक्का फेंककर कांस्य पदक अपने नाम किया। हालांकि प्रदीप की फेंक की दूरी सबसे अधिक रही, लेकिन अलग-अलग दिव्यांगता वर्गों के खिलाड़ियों के संयुक्त मुकाबले में अंतिम स्थान का फैसला रजा अंक प्रणाली के आधार पर हुआ। प्रदीप ने 669 अंक हासिल किए और तीसरे स्थान पर रहे।

पैरा खेलों में खिलाड़ियों को उनकी दिव्यांगता और शारीरिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग वर्गों में रखा जाता है। जब विभिन्न वर्गों के खिलाड़ी एक ही प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं, तो प्रदर्शन का आकलन करने के लिए निर्धारित अंक प्रणाली का उपयोग किया जा सकता है। इसी वजह से किसी खिलाड़ी की फेंक की दूरी अधिक होने के बावजूद उसका स्थान केवल दूरी के आधार पर तय नहीं होता। चक्का फेंक में भारतीय खिलाड़ियों की यह उपलब्धि उनकी मेहनत, अभ्यास और प्रतिस्पर्धी क्षमता को सामने लाती है।

भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन केवल चक्का फेंक तक सीमित नहीं रहा। पैरा एथलेटिक्स की अन्य स्पर्धाओं में भी भारत को कई पदक मिले। महिलाओं की 400 मीटर टी20 दौड़ में दीप्ति जीवनजी ने स्वर्ण पदक हासिल किया। पुरुषों की चक्का फेंक एफ51, एफ52 और एफ53 स्पर्धा में प्रणव सूरमा ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि राम रतन सिंह ने रजत पदक अपने नाम किया। महिलाओं की 200 मीटर टी12 दौड़ में सिमरन ने स्वर्ण पदक जीता और तेजलबेन डामोर ने कांस्य पदक हासिल किया। वहीं, प्रीति पाल ने महिलाओं की 200 मीटर टी35 दौड़ में रजत पदक जीतकर देश की पदक संख्या में इजाफा किया।

भाला फेंक में प्रदीप कुमार ने रजत और आयुष वर्मा ने कांस्य पदक जीता। पुरुषों की गोला फेंक एफ11 स्पर्धा में प्रवीण शर्मा ने कांस्य पदक हासिल किया। इन उपलब्धियों ने भारतीय पैरा एथलेटिक्स के प्रदर्शन को और मजबूती दी। अलग-अलग स्पर्धाओं में खिलाड़ियों की सफलता यह दिखाती है कि भारतीय दल कई खेलों में लगातार प्रतिस्पर्धा कर रहा है।

निशानेबाजी में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते। पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में मनीष नरवाल ने रजत पदक हासिल किया, जबकि महिलाओं की इसी स्पर्धा में सृष्टि अरोड़ा ने कांस्य पदक अपने नाम किया। पैरा पावरलिफ्टिंग में अशोक ने 65 किलोग्राम तक के भार वर्ग में रजत पदक जीता। इन खेलों में मिली सफलता ने भारत के समग्र प्रदर्शन को और बेहतर बनाया।

पैरा टेबल टेनिस में भी भारतीय खिलाड़ियों ने कई कांस्य पदक हासिल किए। सोनलबेन पटेल, भाविना पटेल, प्राची पांडे, सहाना रवि और जहान मदान ने अपने-अपने मुकाबलों में पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। तैराकी में हिमांशु नंदल ने पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता, जबकि निरंजन मुकुंदन ने 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले एसएम7 स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया।

इसके अलावा, पैरा बैडमिंटन में नितेश कुमार, प्रमोद भगत और संजना कुमारी ने अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले जीतकर आगे की चुनौती के लिए जगह बनाई। तीरंदाजी में शीतल देवी ने महिलाओं की व्यक्तिगत कंपाउंड स्पर्धा के फाइनल में प्रवेश किया। इससे भारतीय दल को अन्य स्पर्धाओं में भी पदक की उम्मीदें बनी हुई हैं।

कुल मिलाकर, नागोया में भारतीय पैरा खिलाड़ियों का प्रदर्शन देश के लिए गर्व का विषय बन गया है। पुरुषों की चक्का फेंक स्पर्धा में देवेंद्र कुमार, राकेश और प्रदीप कुमार द्वारा तीनों पदक जीतना प्रतियोगिता की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। अन्य खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों की सफलता से पदक अभियान को मजबूती मिली है। अब सभी की निगाहें आने वाले मुकाबलों पर हैं, जहां भारतीय खिलाड़ी अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर और पदक जीतने की कोशिश करेंगे।

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