Friday, October 30, 2026
Homeताजा खबरदिल्ली में प्रदर्शन के बीच CAPF की तैनाती पर सवाल, पूर्व नौकरशाह...

दिल्ली में प्रदर्शन के बीच CAPF की तैनाती पर सवाल, पूर्व नौकरशाह पहुंचे हाईकोर्ट

दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों यानी सीएपीएफ की बड़े पैमाने पर तैनाती और उसे बार-बार बढ़ाए जाने का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी ने इस तैनाती को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की है। याचिका में सुरक्षा बलों की तैनाती के कानूनी और प्रशासनिक आधार पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही पूरे मामले की न्यायिक समीक्षा किए जाने की मांग की गई है।

याचिका के अनुसार, दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती को लेकर शुरुआत में 301 कंपनियों की मंजूरी का उल्लेख किया गया है। इसके बाद भी बलों की तैनाती में बदलाव और विस्तार किए जाने की बात सामने आई है। याचिका में 273 और 270 कंपनियों की तैनाती बढ़ाए जाने का भी हवाला दिया गया है।

आशीष जोशी ने अदालत से यह जांचने की मांग की है कि राजधानी में प्रदर्शन के दौरान इतनी बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती किन परिस्थितियों में की गई और इसे बार-बार बढ़ाने के पीछे क्या कानूनी तथा प्रशासनिक आधार था। याचिका का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट कराना है कि सुरक्षा बलों की तैनाती से जुड़े फैसले निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप लिए गए या नहीं।

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। ऐसी परिस्थितियों में जरूरत के अनुसार पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की सहायता ली जा सकती है। हालांकि, जब तैनाती बड़े स्तर पर की जाती है या उसकी अवधि और संख्या में लगातार बदलाव होता है, तो उससे जुड़े प्रशासनिक निर्णयों का आधार भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी संदर्भ में पूर्व नौकरशाह ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

याचिका में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती को लेकर लिए गए फैसलों की वैधानिकता और प्रशासनिक औचित्य की समीक्षा किए जाने की मांग की गई है। इस मामले में अदालत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि न्यायिक समीक्षा के माध्यम से सरकारी और प्रशासनिक निर्णयों के कानूनी आधार की जांच की जा सकती है।

हालांकि, याचिका दाखिल होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने तैनाती को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। मामले में उठाए गए सवालों पर न्यायालय का रुख और संबंधित पक्षों की दलीलें आगे की कार्यवाही में महत्वपूर्ण होंगी। फिलहाल, इस याचिका के जरिए दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और उसके बार-बार विस्तार को लेकर कानूनी बहस शुरू हो गई है।

अब इस मामले में अदालत की कार्यवाही पर नजर रहेगी। न्यायिक समीक्षा के दौरान यह स्पष्ट हो सकता है कि सुरक्षा बलों की तैनाती के लिए अपनाई गई प्रक्रिया और उसके विस्तार के पीछे दिए गए आधार कानूनी कसौटी पर कितने उचित हैं।

Loading

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!
🔴
संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल की बैठक लखनऊ गोमती नगर में सम्पन्न हुई • गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर आम आदमी पार्टी की तिरंगा पदयात्रा • डॉ. नेहा सोलंकी को मिला गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रमाणपत्र