पूर्व थल सेना प्रमुख M. M. Naravane की यादों पर आधारित किताब Four Stars of Destiny एक बड़े कानूनी और राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गई है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आरोप है कि रक्षा मंत्रालय से अनिवार्य मंजूरी मिलने से पहले ही किताब का डिजिटल वर्जन अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उपलब्ध हो गया। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह कोई साधारण पायरेसी नहीं, बल्कि एक “प्लांड और कोऑर्डिनेटेड ऑपरेशन” हो सकता है।
संसद में जिक्र के बाद बढ़ा विवाद
रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने संसद में इस किताब का हवाला देने की कोशिश की थी, जिसके बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई।
किताब के प्रकाशक Penguin Random House India ने स्पष्ट किया है कि यह मेमॉयर आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुआ था और इसकी कोई अधिकृत कॉपी बाजार में उपलब्ध नहीं है।
मंजूरी से पहले ग्लोबल सर्कुलेशन का दावा
जांच एजेंसियों के अनुसार, लीक वर्जन अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हुआ था।
सूत्रों का कहना है कि शुरुआती अपलोड एक “.io” डोमेन एक्सटेंशन वाली वेबसाइट पर ट्रेस किया गया, जिसके बाद कंटेंट को कई अन्य होस्टिंग प्लेटफॉर्म पर मिरर किया गया।
ISBN ट्रेल से उठे सवाल
जांच का एक अहम पहलू लीक हुई कॉपी में इंटरनेशनल स्टैंडर्ड बुक नंबर (ISBN) का होना है। ISBN एक 13-अंकों का यूनिक कोड होता है, जो किसी पुस्तक के प्रत्येक संस्करण और फॉर्मेट के लिए जारी किया जाता है।
अधिकारियों का मानना है कि ISBN का होना यह संकेत देता है कि यह कोई कच्चा ड्राफ्ट नहीं, बल्कि प्रकाशन के लिए तैयार प्रोसेस्ड कॉपी थी।
जांच एजेंसियां अब ISBN रजिस्ट्रेशन और वितरण प्रक्रिया की भी पड़ताल कर रही हैं।
ऑर्गनाइज़्ड ब्रीच का शक
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अपलोड, इंटरनेशनल लिस्टिंग और ISBN-लिंक्ड डिस्ट्रीब्यूशन का क्रम एक संगठित उल्लंघन की ओर इशारा करता है।
जांच अब अंतरराष्ट्रीय डिजिटल फुटप्रिंट्स, वित्तीय लेन-देन और संभावित विदेशी सहयोगियों की भूमिका की जांच तक बढ़ा दी गई है।
रक्षा मंत्रालय की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
निष्कर्ष
General MM Naravane Book Leak विवाद ने प्रकाशन प्रक्रिया, आधिकारिक मंजूरी और डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में संगठित साजिश की पुष्टि होती है, तो यह मामला अंतरराष्ट्रीय कानूनी आयाम भी ले सकता है।
फिलहाल दिल्ली पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे संभव हैं।




