Sunday, February 15, 2026
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Deendayal Upadhyay Death Anniversary: BJP के ‘गांधी’ कहे जाते थे दीनदयाल उपाध्याय

भारत के आधुनिक राजनीतिक इतिहास में Deendayal Upadhyay का नाम एक महत्वपूर्ण विचारक और संगठनकर्ता के रूप में लिया जाता है। 11 फरवरी 1968 को उनकी मृत्यु हुई थी। वे भारतीय जनसंघ के सह-संस्थापक थे और उनकी विचारधारा का प्रभाव आज भी भारतीय जनता पार्टी की नीतियों में देखा जाता है।

कई राजनीतिक विश्लेषक उन्हें संगठनात्मक दृष्टि से BJP का “गांधी” भी कहते हैं, क्योंकि उन्होंने पार्टी की वैचारिक नींव को मजबूत किया।

दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन में ही माता-पिता के निधन के बाद उनका पालन-पोषण उनके मामा-मामी ने किया।

उन्होंने कानपुर से स्नातक (BA) और आगरा से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर (MA) की पढ़ाई की।

साल 1937 में वे Rashtriya Swayamsevak Sangh से जुड़े और बाद में सक्रिय रूप से संगठनात्मक कार्य करने लगे।


🏛 जनसंघ में भूमिका

साल 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित Bharatiya Jana Sangh में दीनदयाल उपाध्याय की अहम भूमिका रही। 1952 में उन्हें पार्टी का महामंत्री बनाया गया।

उन्होंने संगठन को मजबूत करने और विचारधारा को स्पष्ट रूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपनी मृत्यु से लगभग 43 दिन पहले उन्होंने जनसंघ का अध्यक्ष पद संभाला था।

बाद में जनसंघ के जनता पार्टी में विलय और फिर Bharatiya Janata Party के गठन के बाद भी उनकी विचारधारा का प्रभाव कायम रहा।


📚 ‘एकात्म मानववाद’ की विचारधारा

दीनदयाल उपाध्याय ने “एकात्म मानववाद” (Integral Humanism) का सिद्धांत दिया। इस विचारधारा का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के आधार पर विकास का मॉडल प्रस्तुत करना था।

BJP आज भी अपनी नीतियों और घोषणापत्र में इस विचारधारा का उल्लेख करती है।


⚖️ राजनीतिक पृष्ठभूमि और उथल-पुथल का दौर

1960 का दशक भारतीय राजनीति में अस्थिरता का समय था।

Jawaharlal Nehru के निधन (1964) के बाद Lal Bahadur Shastri प्रधानमंत्री बने। 1965 के भारत-पाक युद्ध और ताशकंद समझौते के बाद शास्त्री जी का निधन हो गया।

इसके बाद Indira Gandhi प्रधानमंत्री बनीं। 1967 के आम चुनावों में कांग्रेस को पहले की तुलना में कम बहुमत मिला। देश राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा था।


❓ रहस्यमयी मृत्यु

11 फरवरी 1968 को वाराणसी के पास Mughal Sarai Junction (अब दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन) पर उनका शव संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया।

उनकी मृत्यु को लेकर कई सवाल उठे। आधिकारिक तौर पर इसे चोरी के प्रयास से जुड़ी घटना बताया गया, लेकिन कई लोग आज भी इसे रहस्यमयी मानते हैं।

उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी विचारधारा और संगठनात्मक दृष्टिकोण भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।


निष्कर्ष

Deendayal Upadhyay Death Anniversary के अवसर पर उनका जीवन, विचार और योगदान भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाता है।

उन्होंने संगठन निर्माण, वैचारिक स्पष्टता और “एकात्म मानववाद” के माध्यम से एक ऐसी नींव रखी, जिसका प्रभाव आज भी भारतीय जनता पार्टी की नीतियों और रणनीतियों में दिखाई देता है।


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