Sunday, February 15, 2026
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Viksit Bharat का संकल्प: PM Modi ने सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन राष्ट्र को समर्पित किए, बोले- गुलामी के प्रतीक मिटा रहे हैं

Viksit Bharat का संकल्प: PM Modi बोले- गुलामी के प्रतीक मिटाकर बना रहे स्वतंत्र भारत की पहचान

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन 1 एवं 2 का उद्घाटन करते हुए कहा कि 13 फरवरी का दिन भारत के विकास पथ में एक नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने इसे “विकसित भारत” के संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हम सभी एक नए इतिहास के साक्षी बन रहे हैं और यह परिसर 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समर्पित है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि North Block और South Block जैसी इमारतें ब्रिटिश शासन की प्रशासनिक सोच को लागू करने के लिए बनाई गई थीं।

वहीं अब सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे परिसर जनता की अपेक्षाओं को केंद्र में रखकर तैयार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यहां से लिए जाने वाले फैसले किसी शासक की सोच नहीं, बल्कि नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होंगे।


21वीं सदी के अनुरूप कार्यस्थल

प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी के पहले क्वार्टर के पूरा होने के बाद यह आवश्यक है कि विकसित भारत की झलक केवल नीतियों में नहीं, बल्कि कार्यस्थलों और भवनों में भी दिखाई दे।

उन्होंने पुराने भवनों में जगह की कमी और जर्जर ढांचे की ओर संकेत करते हुए कहा कि नए परिसरों से प्रशासनिक दक्षता और उत्पादकता में वृद्धि होगी।


खर्च में कमी और बेहतर प्रबंधन

प्रधानमंत्री के अनुसार, दिल्ली में विभिन्न मंत्रालय 50 से अधिक स्थानों से संचालित हो रहे थे, जिन पर प्रतिवर्ष करीब 1,500 करोड़ रुपये किराए के रूप में खर्च होते थे।

नए भवनों के निर्माण से न केवल खर्च में कमी आएगी, बल्कि कर्मचारियों का समय भी बचेगा और लॉजिस्टिक प्रबंधन बेहतर होगा।


गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का अभियान

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्र भारत को गुलामी के प्रतीकों से मुक्त करना आवश्यक है।

उन्होंने National War Memorial और पुलिस स्मारक जैसे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल नाम बदलने का निर्णय नहीं, बल्कि सत्ता के मिजाज को सेवा भावना में बदलने का प्रयास है।

उन्होंने बताया कि रेसकोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया और राजपथ को Kartavya Path के रूप में विकसित किया गया।


स्वतंत्र पहचान की ओर कदम

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सभी निर्णयों के पीछे एक व्यापक विजन है, जो भारत के अतीत, वर्तमान और भविष्य को गौरव से जोड़ता है।

कर्तव्य पथ को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित कर इसे नागरिकों के लिए एक जीवंत स्थल बनाया गया है।


निष्कर्ष

Viksit Bharat के संकल्प के साथ सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का उद्घाटन प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक बनाने और राष्ट्रीय पहचान को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सरकार का कहना है कि यह पहल केवल संरचनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि सोच और व्यवस्था में परिवर्तन का प्रतीक है।


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