विद्युत कर्मचारी मोर्चा, उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण बैठक संगठन के केंद्रीय कार्यालय, नरही (लखनऊ) में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश अवस्थी ‘बब्बू’ ने की। बैठक में आगामी 46वें वार्षिक महाधिवेशन की तैयारियों के साथ-साथ कर्मचारियों की लंबित मांगों पर ठोस रणनीति बनाने को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
22 फरवरी को होगा 46वां वार्षिक महाधिवेशन
संगठन का 46वां वार्षिक महाधिवेशन 22 फरवरी को गांधी भवन प्रेक्षागृह, कैसरबाग, लखनऊ में आयोजित किया जाएगा। बैठक में महाधिवेशन की रूपरेखा, अतिथियों की उपस्थिति, कार्यसूची तथा संगठनात्मक मुद्दों को अंतिम रूप देने पर चर्चा की गई। पदाधिकारियों ने महाधिवेशन को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारी करने का निर्णय लिया।
आंदोलन की चेतावनी और प्रबंधन से वार्ता
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश अवस्थी ‘बब्बू’ ने बताया कि 4 फरवरी 2026 को कर्मचारी समस्याओं के समाधान हेतु प्रबंधन को आंदोलन की नोटिस दी गई थी। नोटिस के अनुसार 12 फरवरी से केंद्रीय अध्यक्ष अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने वाले थे।
हालांकि, प्रबंधन द्वारा संगठन के प्रतिनिधियों को शीघ्र वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया और समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया। इसके बाद संगठन ने अनशन कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित कर दिया। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यदि आश्वासन पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आगे की रणनीति तय करेगा।
प्रमुख लंबित मांगें
बैठक में सहमति बनी एवं अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करते हुए निम्नलिखित मांगों को प्रमुखता से उठाया गया—
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फरवरी 2009 के बाद शेष तृतीय श्रेणी के कार्मिकों को तृतीय समयबद्ध वेतनमान 6600 रुपये प्रदान किया जाए।
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लिपिकीय कर्मचारियों के एकतरफा स्थानांतरण को समाप्त किया जाए, क्योंकि लिपिकीय सेवा विनियमावली 1970 के अनुसार उनका स्थानांतरण मंडल स्तर तक ही सीमित होना चाहिए।
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लिपिकीय कर्मचारियों की लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण किया जाए।
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पूर्व में हुए समझौते के अनुरूप आमेलन के आदेश जारी किए जाएं।
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कार्मिकों एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिल रही एसटीडी-10 सुविधा बहाल रखी जाए तथा मीटर लगाने की प्रक्रिया समाप्त की जाए।
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वर्तमान वर्टिकल व्यवस्था की समीक्षा कर पूर्व व्यवस्था लागू की जाए।
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कार्यभार को देखते हुए हटाए गए संविदा कर्मचारियों को पुनः बहाल किया जाए।
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राज्य सरकार की घोषणा के अनुरूप संविदा कर्मियों का वेतन बढ़ाया जाए।
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अनावश्यक न्यायालयीन प्रक्रिया समाप्त कर सेस कार्मिकों को वर्ष 1997 से पेंशन का लाभ दिया जाए।
पदाधिकारियों की उपस्थिति
बैठक में गोपाल कृष्ण गौतम, मोहन जी श्रीवास्तव, छोटेलाल दीक्षित, नवीन गौतम, ए.के. माथुर, पी.सी. वर्मा, अजय अवस्थी और कन्हैया लाल सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष:
विद्युत कर्मचारी मोर्चा की इस केंद्रीय बैठक में संगठनात्मक मजबूती, कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा और लंबित मांगों के समाधान को प्राथमिकता दी गई। अब सभी की निगाहें 22 फरवरी को होने वाले वार्षिक महाधिवेशन और प्रबंधन के साथ होने वाली वार्ता के परिणामों पर टिकी हैं।

