पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है। अमेरिकी वायु सेना के B-1 Bomber Jets के युद्ध मिशन पर निकलने के बाद संघर्ष और भी खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है।रिपोर्ट के अनुसार इंग्लैंड के RAF फेयरफोर्ड सैन्य ठिकाने से दो अमेरिकी B-1 बमवर्षक विमानों ने उड़ान भरी और फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप को निशाना बनाया।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस हमले में द्वीप पर मौजूद कई सैन्य ठिकाने पूरी तरह तबाह कर दिए गए।खार्ग द्वीप क्यों है इतना महत्वपूर्णखार्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम माना जाता है। बताया जाता है कि ईरान के करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप से होता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस द्वीप की तेल संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचता है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।ब्रिटेन ने दी सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमतिब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने पुष्टि की है कि ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य अभियानों के लिए अपने दो सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दी है।इस तैनाती से अमेरिकी विमानों को ईरान के लक्ष्यों तक पहुंचने में लगने वाला समय लगभग आधा रह गया है।युद्ध का दायरा बढ़ता जा रहाइस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान में किए गए समन्वित हवाई हमलों से हुई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल तथा ड्रोन हमले शुरू कर दिए।अब यह युद्ध धीरे-धीरे पूरे पश्चिम एशिया में फैलता नजर आ रहा है।होरमुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंताईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी को भी निशाना बनाया है। यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है।इसके प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगी हैं।खाड़ी देशों में भी बढ़ा तनावसंघर्ष का असर अब खाड़ी देशों तक पहुंच चुका है।संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा तेल टर्मिनल पर ड्रोन हमले की खबरें सामने आई हैं।कतर की राजधानी दोहा में मिसाइलों को मार गिराया गया।सऊदी अरब ने भी अपने हवाई क्षेत्र में कई ड्रोन नष्ट करने का दावा किया है।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

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