Tuesday, May 26, 2026
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Trump ने ठुकराई Zelenskyy की Drone मदद, ईरान ने यूक्रेन को दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के रिश्तों में तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। ट्रंप ने ईरानी ड्रोन से निपटने में यूक्रेन की मदद की पेशकश को सख्त लहजे में ठुकरा दिया है।

Zelenskyy ने दी थी ड्रोन से लड़ने की पेशकश

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने हाल ही में कहा था कि उनके देश के पास रूसी हमलों के दौरान ईरानी ‘शाहिद’ ड्रोन्स को रोकने का बड़ा अनुभव है।

उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को इस तकनीक और विशेषज्ञता के जरिए मदद देने की पेशकश की थी। जेलेंस्की ने यह भी कहा कि यूक्रेन की टीमें कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के साथ इस अनुभव को साझा कर सकती हैं।

Trump ने सीधे तौर पर किया इनकार

हालांकि NBC News को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने इस प्रस्ताव को सीधे खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा,

“हमें उनकी मदद की जरूरत नहीं है। हमारे पास दुनिया की सबसे बेहतरीन ड्रोन तकनीक है।”

ट्रंप ने जेलेंस्की की आलोचना करते हुए उन्हें “डील करना मुश्किल व्यक्ति” भी बताया और कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बातचीत के लिए ज्यादा तैयार दिखते हैं।

ईरान ने यूक्रेन को दी चेतावनी

इस मामले में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। एक ईरानी नेता ने चेतावनी दी कि अगर यूक्रेन ईरानी ड्रोन के खिलाफ सैन्य तकनीक या विशेषज्ञों की मदद करता है, तो पूरा यूक्रेन ईरान के लिए वैध सैन्य लक्ष्य बन सकता है।

ईरान का आरोप है कि यूक्रेन इस युद्ध में अमेरिका और इजराइल का साथ दे रहा है।

तेल संकट के बीच रूस पर नरम पड़े ट्रंप

दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते संकट के कारण वैश्विक तेल बाजार पर भारी दबाव पड़ रहा है।

इस स्थिति को देखते हुए ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने का फैसला किया है।

ट्रंप ने कहा,

“मैं दुनिया के लिए तेल चाहता हूं। जैसे ही मध्य पूर्व का संकट खत्म होगा, प्रतिबंध फिर से लागू कर दिए जाएंगे।”

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के लिए खतरा बढ़ा दिया है।

यह समुद्री मार्ग बेहद अहम माना जाता है क्योंकि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर गंभीर पड़ सकता है।

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