आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) के पहली तिमाही (Q1) के नतीजों से पहले गुरुवार को कंपनी के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। जहां एक ओर घरेलू शेयर बाजार मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा, वहीं आईटी शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। निवेशकों की निगाहें अब सिर्फ कंपनी के मुनाफे और आय पर नहीं, बल्कि भविष्य की मांग, बड़े सौदों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी रणनीति पर टिकी हुई हैं।
शुरुआती कारोबार में टीसीएस का शेयर करीब 2 प्रतिशत तक टूट गया। रिपोर्टों के अनुसार शेयर लगभग 1.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,018.50 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। कंपनी के शेयरों में इस वर्ष अब तक भारी गिरावट देखने को मिली है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है।
टीसीएस के साथ-साथ आईटी सेक्टर की अन्य प्रमुख कंपनियों जैसे इन्फोसिस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा के शेयरों में भी कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि, इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते रहे, जिससे यह साफ हुआ कि दबाव मुख्य रूप से आईटी सेक्टर पर है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार निवेशकों की सबसे बड़ी दिलचस्पी कंपनी के वित्तीय नतीजों से ज्यादा प्रबंधन की भविष्य की रणनीति में है। खासकर यह देखा जाएगा कि कंपनी वैश्विक मांग, बड़े क्लाइंट्स के खर्च, नए डील्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं को लेकर क्या संकेत देती है।
विश्लेषकों के अनुमान के मुताबिक, कंपनी की डॉलर में आय पिछली तिमाही की तुलना में मामूली घट सकती है, जबकि भारतीय मुद्रा में राजस्व में हल्की बढ़त की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं शुद्ध लाभ में भी स्थिर प्रदर्शन की संभावना व्यक्त की गई है। हालांकि कर्मचारियों के वार्षिक वेतन संशोधन के कारण ऑपरेटिंग मार्जिन पर कुछ दबाव पड़ सकता है।
जानकारों का मानना है कि इस तिमाही में टीसीएस को 7 से 10 अरब डॉलर तक के नए बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं। पिछली तिमाही में कंपनी ने लगभग 12 अरब डॉलर के बड़े सौदे हासिल किए थे। ऐसे में नए ऑर्डर्स का आंकड़ा भी निवेशकों के लिए अहम रहेगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी टीसीएस लगातार निवेश बढ़ा रही है। कंपनी एआई आधारित समाधान, डेटा सेंटर और नई तकनीकों पर तेजी से काम कर रही है। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई उसके कारोबार की सबसे बड़ी विकास संभावनाओं में से एक साबित हो सकता है।
इसके अलावा निवेशकों की नजर बीएसएनएल परियोजना के अगले चरण, जनरेटिव एआई, हाइपरवॉल्ट प्लेटफॉर्म, वैश्विक ग्राहकों के आईटी खर्च और दुनिया में जारी आर्थिक व भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी रहेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता का असर आईटी कंपनियों के नए निवेश और ऑर्डर्स पर पड़ सकता है।
अब बाजार की निगाहें टीसीएस के Q1 नतीजों और कंपनी प्रबंधन की टिप्पणी पर टिकी हैं। यदि कंपनी भविष्य की मांग और एआई कारोबार को लेकर सकारात्मक संकेत देती है, तो इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है। वहीं कमजोर आउटलुक शेयरों पर आगे भी दबाव बना सकता है।
![]()

