उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने भारतीय वायुसेना के जवान अनुराग शुक्ला को छेड़छाड़ के आरोपों से बरी कर दिया है। यह फैसला करीब सात साल बाद आया, जिससे एक लंबी कानूनी लड़ाई का अंत हुआ।
मामला वर्ष 2019 का है, जब 15 साल की एक लड़की ने आरोप लगाया था कि उसके जीजा ने उसके साथ छेड़छाड़ की। आरोप के आधार पर नौबस्ता थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस केस में वायुसेना के जवान को गिरफ्तार भी किया गया और उन्हें जमानत मिलने से पहले 19 दिन जेल में बिताने पड़े।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में एक चौंकाने वाला मोड़ आया। कथित पीड़िता ने अदालत को बताया कि वह घटना वाली रात एंटीबायोटिक दवाएं ले रही थी और अर्द्धबेहोशी की हालत में थी। उसी दौरान उसे सपने में महसूस हुआ कि उसके जीजा उसके साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। डरकर वह उठी और शोर मचाया। बाद में परिवार ने भी अदालत में कहा कि शिकायत गलतफहमी में दर्ज कराई गई थी।
विशेष पॉक्सो अदालत की न्यायाधीश ने सभी सबूतों और गवाहों के बयान के आधार पर वायुसेना के जवान को बरी कर दिया। हालांकि इस केस की वजह से उन्हें 7 साल तक मानसिक तनाव, सामाजिक बदनामी और करियर में नुकसान झेलना पड़ा। उन्होंने बताया कि इस केस की वजह से उनकी पदोन्नति भी रुक गई।
यह मामला दिखाता है कि संवेदनशील मामलों में जांच और सबूत कितने महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि एक आरोप किसी व्यक्ति के करियर, सम्मान और मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाल सकता है। फिलहाल कोर्ट के फैसले के बाद यह मामला समाप्त हो गया है।
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