Sunday, April 19, 2026
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर विवाद: उपभोक्ता परिषद ने उठाए गंभीर सवाल, नए कनेक्शनों में पोस्टपेड विकल्प बहाल करने की मांग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नए बिजली कनेक्शनों में केवल प्रीपेड मोड लागू किए जाने को नियमों के विरुद्ध बताते हुए झटपट पोर्टल पर पोस्टपेड और प्रीपेड दोनों विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की है। परिषद का कहना है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा 1 अप्रैल 2026 से प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के बावजूद प्रदेश में पावर कॉरपोरेशन द्वारा केवल प्रीपेड मोड लागू करना कानून और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।

मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत, लेकिन जांच अवधि पर सवाल

उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर स्थापना पर रोक लगाने के मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत करते हुए इसे उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया है। हालांकि परिषद ने चार सदस्यीय तकनीकी समिति को 10 दिन में रिपोर्ट देने की समय सीमा पर सवाल उठाए हैं।

परिषद का कहना है कि यह मामला गंभीर तकनीकी जांच का है, जिसमें स्मार्ट मीटरों के नमूने लेकर स्वतंत्र लैब में परीक्षण, MDM (मीटर डेटा मैनेजमेंट) और HES प्रणाली की समीक्षा, तथा संभावित विदेशी कंपोनेंट्स की जांच शामिल होनी चाहिए। ऐसे में 10 दिन की समय-सीमा अपर्याप्त है और जांच के लिए पर्याप्त समय दिया जाना जरूरी है।

70 लाख उपभोक्ताओं के प्रीपेड कन्वर्जन पर उठे सवाल

उपभोक्ता परिषद ने दावा किया कि प्रदेश के लगभग 70 लाख बिजली उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटरों को उनकी सहमति के बिना प्रीपेड मोड में परिवर्तित किया गया है। परिषद ने मांग की है कि इन सभी कनेक्शनों को तत्काल पोस्टपेड मोड में वापस किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं के साथ न्याय हो सके।

परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्प चुनने का अधिकार देती है। ऐसे में केवल प्रीपेड कनेक्शन देना राष्ट्रीय कानून और केंद्रीय दिशा-निर्देशों के विपरीत है।

नए बिजली कनेक्शनों में केवल प्रीपेड मोड लागू करने पर आपत्ति

उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया कि 2 अप्रैल से 19 अप्रैल 2026 के बीच जारी किए गए सभी नए बिजली कनेक्शन प्रीपेड मोड में दिए गए। परिषद द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार—

  • कुल 94,471 आवेदन प्राप्त हुए
  • 37,701 उपभोक्ताओं के निरीक्षण पूरे हुए
  • 42,301 आवेदन स्वीकृत किए गए
  • 8,341 बिजली कनेक्शन जारी किए गए
  • 12,630 आवेदन अभी लंबित हैं

परिषद का कहना है कि इन सभी कनेक्शनों में पोस्टपेड विकल्प न देना उपभोक्ता अधिकारों का हनन है।

स्मार्ट मीटर गुणवत्ता जांच पूरी होने तक पोस्टपेड कनेक्शन देने की मांग

परिषद ने सवाल उठाया कि जब स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता जांच के अधीन है और उपभोक्ताओं के परिसरों में उनकी स्थापना पर रोक लगी हुई है, तो नए कनेक्शनों में इन्हीं स्मार्ट प्रीपेड मीटरों का उपयोग क्यों किया जा रहा है।

परिषद ने मांग की है कि जब तक तकनीकी जांच पूरी न हो जाए और गुणवत्ता प्रमाणित न हो, तब तक नए बिजली कनेक्शन पारंपरिक पोस्टपेड मीटरों के माध्यम से दिए जाएं।

सरकार से स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग

उपभोक्ता परिषद ने राज्य सरकार, सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी, और विद्युत नियामक आयोग से मांग की है कि प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं, ताकि लागू कानूनों और उपभोक्ता अधिकारों का पालन सुनिश्चित हो सके।

परिषद का कहना है कि कानून सर्वोपरि है और उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।

निष्कर्ष

स्मार्ट प्रीपेड मीटर विवाद अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकार, पारदर्शिता और कानून पालन का बड़ा प्रश्न बन चुका है। अब निगाहें तकनीकी समिति की रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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