ईरान इस समय गहरे राजनीतिक और संस्थागत संकट से गुजर रहा है, जहां सत्ता के शीर्ष स्तर पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। इस संकट के केंद्र में हैं विदेश मंत्री Abbas Araghchi, जिनकी कुर्सी अब खतरे में बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf दोनों ही अराघची के कामकाज से नाराज हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोप है कि अराघची ने हाल ही में हुई संवेदनशील परमाणु वार्ताओं के दौरान सरकार के बजाय इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के निर्देशों का पालन किया। खास तौर पर कमांडर Ahmad Vahidi के साथ उनकी नजदीकियों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। राष्ट्रपति का मानना है कि यह व्यवहार सरकार की नीति और अधिकार क्षेत्र को कमजोर करता है।
ईरान की सत्ता संरचना पहले से ही जटिल रही है, जहां राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। मौजूदा विवाद ने इस संतुलन को और अधिक कमजोर कर दिया है। राष्ट्रपति पेजेशकियन का मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों पर युद्ध और तनाव का भारी असर पड़ रहा है, जबकि सैन्य नेतृत्व सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दे रहा है।
सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति खुद को सीमित अधिकारों के बीच काम करने को मजबूर महसूस कर रहे हैं। उनका दावा है कि कई अहम सरकारी नियुक्तियों में भी उनका पूर्ण नियंत्रण नहीं है। दूसरी ओर, IRGC का तर्क है कि वर्तमान हालात में संवेदनशील पदों पर सैन्य नियंत्रण जरूरी है।
इस आंतरिक खींचतान का असर ईरान की विदेश नीति पर भी पड़ा है। अमेरिका के साथ चल रही वार्ताओं में भी असहमति साफ दिखाई दी। बताया जा रहा है कि वार्ता टीम के भीतर मतभेदों के कारण अप्रैल के मध्य में बातचीत को रोकना पड़ा।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल के पास अंतिम निर्णय लेने का अधिकार नहीं था और उन्हें उच्च नेतृत्व की मंजूरी का इंतजार करना पड़ रहा था। इससे वार्ता प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।
बताया जाता है कि अराघची ने वार्ता के दौरान कुछ मुद्दों पर लचीलापन दिखाया था, जिसमें क्षेत्रीय सहयोगियों को दी जाने वाली सहायता में कटौती का प्रस्ताव शामिल था। हालांकि, इस रुख का सुरक्षा प्रतिष्ठान के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने विरोध किया।
हालांकि अभी तक विदेश मंत्री को हटाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक संकेत साफ हैं कि ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष तेजी से गहरा रहा है। यह स्थिति न केवल देश की आंतरिक राजनीति बल्कि वैश्विक कूटनीति पर भी असर डाल सकती है।
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या राष्ट्रपति पेजेशकियन कोई बड़ा कदम उठाते हैं या फिर यह संकट और गहराता है।
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