उत्तर प्रदेश का मेरठ अब केवल पारंपरिक उद्योगों के लिए ही नहीं, बल्कि तेजी से उभरते स्टार्टअप और स्वरोजगार मॉडल के लिए भी पहचान बना रहा है। राज्य सरकार की मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना, स्टैंड-अप इंडिया और अन्य स्वरोजगार योजनाओं का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। इन योजनाओं की मदद से कई युवा और महिला उद्यमी अपने व्यवसाय शुरू कर रहे हैं और दूसरों के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
सरकार का उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनाना है। इसी सोच के तहत विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। मेरठ में इसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है, जहां छोटे स्तर पर शुरू हुए कई कारोबार अब सफल उद्योगों का रूप ले चुके हैं।
इन सफल उदाहरणों में युवा उद्यमी राजकुमार ठाकुर का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। उन्होंने सरकारी योजनाओं की सहायता से मोमोज निर्माण का कारोबार शुरू किया, जो आज एक संगठित इकाई के रूप में विकसित हो चुका है। उनकी फैक्ट्री में वर्तमान में आठ महिलाएं और तीन पुरुष नियमित रूप से कार्यरत हैं। इसके अलावा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 50 लोगों को रोजगार मिल रहा है। उनका मानना है कि सरकारी सहायता और सही मार्गदर्शन मिलने से छोटे व्यवसाय भी बड़े स्तर तक पहुंच सकते हैं।
इसी तरह महिला उद्यमी ममता गर्ग ने भी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर हैंडीक्राफ्ट उद्योग की शुरुआत की। आज उनका व्यवसाय कई लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहा है और स्थानीय स्तर पर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दे रहा है। उनके अनुसार, सरकारी योजनाओं ने महिलाओं में उद्यमिता की नई सोच विकसित की है और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का आत्मविश्वास दिया है।
राज्य सरकार का कहना है कि स्टार्टअप और स्वरोजगार योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि युवाओं और महिलाओं को नवाचार, कौशल विकास और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करना भी है। इसके तहत नए उद्यमियों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और व्यवसाय विस्तार से जुड़ी विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मेरठ में लगातार बढ़ रहे छोटे और मध्यम उद्योग इस बात का संकेत हैं कि स्वरोजगार आधारित मॉडल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे न केवल बेरोजगारी कम करने में मदद मिल रही है, बल्कि स्थानीय स्तर पर उत्पादन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह युवाओं और महिलाओं को प्रोत्साहन मिलता रहा, तो मेरठ आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के प्रमुख स्टार्टअप केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत आधार मिलेगा।
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