उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर दौरे के दौरान विपक्ष पर तीखा हमला बोला। वर्धमान कॉलेज में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री ने एक ओर प्रदेश को 1,003 करोड़ रुपये से अधिक की 76 विकास परियोजनाओं की सौगात दी, तो वहीं दूसरी ओर अपने संबोधन में पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यशैली और राजनीति पर भी निशाना साधा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले कुछ लोग बिजनौर को अपशकुन मानते थे और यहां आने से बचते थे। उन्होंने कहा, “बिजनौर को अपशकुन बताने वाले नेता खुद ही अपशकुनी थे।” योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह भूमि भगवान श्रीकृष्ण और महात्मा विदुर से जुड़ी पवित्र धरती है, इसलिए इसे अपशकुन कहना उचित नहीं हो सकता।
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले के शासकों के पास जनता से मिलने का समय नहीं होता था, जबकि उनकी सरकार विकास और जनसेवा को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने दावा किया कि आज प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है और विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन के दौरान एक और राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि “हमें जिन्ना नहीं, गन्ना चाहिए।” इस बयान के जरिए उन्होंने किसानों, कृषि और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में गन्ने के महत्व का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। साथ ही कई सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को चेक और प्रमाण पत्र भी वितरित किए। सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार बिना भेदभाव के विकास कार्य कर रही है और प्रदेश के हर जिले तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष की ओर से इन टिप्पणियों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी सभी की नजर बनी हुई है।
फिलहाल बिजनौर की इस जनसभा में विकास परियोजनाओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री के राजनीतिक बयान भी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। आने वाले दिनों में इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
![]()

