विश्व कप फाइनल से पहले अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई का एक फैसला दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया है। जहां दुनिया भर के प्रशंसक स्टेडियम में अपनी टीम का हौसला बढ़ाने पहुंच रहे हैं, वहीं अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने साफ कर दिया है कि वे न्यू जर्सी नहीं जाएंगे। इसकी वजह कोई सुरक्षा या व्यस्तता नहीं, बल्कि उनका अंधविश्वास है।
जेवियर मिलेई ने कहा है कि वे स्पेन के खिलाफ होने वाला विश्व कप फाइनल अपने आधिकारिक निवास ओलिवोस से ही देखेंगे। उनका मानना है कि अब तक टीम के सभी मुकाबले उन्होंने घर पर बैठकर देखे हैं और अर्जेंटीना हर मैच जीतने में सफल रहा है। इसलिए वे अपनी इस दिनचर्या को बदलना नहीं चाहते।
राष्ट्रपति ने एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान वे एक खास जैकेट पहनकर मैच देखते रहे हैं। एक मुकाबले में जब उन्हें गर्मी लगी और उन्होंने जैकेट उतार दी, उसी दौरान विपक्षी टीम ने गोल कर दिया। इसके बाद उन्होंने तुरंत जैकेट दोबारा पहन ली और मैच खत्म होने तक उसे नहीं उतारा। उनके अनुसार, फाइनल के दिन भी वे वही जैकेट पहनकर मैच देखेंगे।
अर्जेंटीना में इस तरह की मान्यताओं को ‘काबालास’ कहा जाता है। यह ऐसी परंपराएं या व्यक्तिगत आदतें होती हैं, जिन्हें लोग अपनी टीम के लिए शुभ मानते हैं। कई प्रशंसक हर मैच में एक ही कपड़े पहनते हैं, कुछ लोग पूरे टूर्नामेंट के दौरान अपनी जर्सी तक नहीं धोते, तो कुछ हमेशा एक ही जगह बैठकर मैच देखते हैं।
कुछ प्रशंसकों का तो यह भी मानना है कि यदि किसी विशेष व्यक्ति की मौजूदगी में टीम अच्छा खेलती है, तो वही व्यवस्था हर मैच में दोहराई जानी चाहिए। इसी वजह से कई लोग मैच के दौरान अपनी सीट तक नहीं बदलते।
रिपोर्टों के अनुसार, अर्जेंटीना में विश्व कप के दौरान कई अनोखी रस्में देखने को मिलती हैं। कुछ प्रशंसक मैच शुरू होने से पहले धार्मिक प्रार्थना करते हैं, तो कुछ प्रतिद्वंद्वी टीम की तस्वीर या नाम लिखे कागज को बर्फ में रखकर प्रतीकात्मक रूप से अपनी टीम की जीत की कामना करते हैं। हालांकि इन मान्यताओं का खेल के परिणामों से कोई वैज्ञानिक संबंध स्थापित नहीं है।
अर्जेंटीना की राजनीति में भी इससे जुड़ा एक पुराना किस्सा प्रचलित है। बताया जाता है कि 1990 विश्व कप के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति कार्लोस मेनेम टीम से मिले थे और उसके बाद शुरुआती मुकाबले में अर्जेंटीना हार गया था। इसके बाद कुछ लोगों ने इसे अशुभ मान लिया। तभी से कई राष्ट्रपतियों ने बड़े मैचों के दौरान स्टेडियम जाने से परहेज किया।
हालांकि खेल विशेषज्ञ लगातार कहते हैं कि किसी भी मैच का परिणाम खिलाड़ियों के प्रदर्शन, रणनीति और तैयारी पर निर्भर करता है, न कि अंधविश्वासों पर। फिर भी खेलों की दुनिया में ऐसी व्यक्तिगत मान्यताएं और रूटीन लंबे समय से खिलाड़ियों और प्रशंसकों का हिस्सा रहे हैं।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या राष्ट्रपति जेवियर मिलेई की यह ‘लकी रूटीन’ अर्जेंटीना के लिए एक और विश्व कप खिताब के साथ जुड़ती है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि उनका यह फैसला दुनिया भर में चर्चा का विषय जरूर बन गया है।
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