कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के उस बयान पर सवाल उठाए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी विपक्ष के लिए नहीं थी। चिदंबरम ने पूछा कि अगर प्रधानमंत्री का निशाना विपक्ष नहीं था, तो आखिर वह टिप्पणी किसके लिए थी?
24 अगस्त को दिए अपने बयान में चिदंबरम ने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष को संबोधित नहीं किया गया था, तो ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के पीछे किस वर्ग या समूह को निशाना बनाया गया, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
चिदंबरम ने अपने उस सोशल मीडिया पोस्ट का भी बचाव किया, जिसमें उन्होंने खुद को ‘गर्व से दिमागी नक्सल’ बताया था। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। कांग्रेस नेता का कहना है कि सत्ता पक्ष की ओर से विपक्षी नेताओं और असहमति जताने वाली आवाजों के लिए लंबे समय से अलग-अलग तरह के आपत्तिजनक राजनीतिक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता रहा है।
उन्होंने ‘अर्बन नक्सल’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया और कहा कि राजनीतिक बहस में इस तरह के लेबल लगाने से लोकतांत्रिक संवाद की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस टिप्पणी से हुई, जिसे लेकर विपक्ष ने आपत्ति जताई। विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया गया। वहीं सरकार की ओर से यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी का संदर्भ विपक्षी दल नहीं था।
अब चिदंबरम के पलटवार के बाद राजनीतिक बहस एक नए सवाल पर केंद्रित हो गई है। कांग्रेस नेता सीधे पूछ रहे हैं कि अगर प्रधानमंत्री का बयान विपक्ष के लिए नहीं था, तो उसका वास्तविक निशाना कौन था।
चिदंबरम ने अपने बयान के जरिए राजनीतिक भाषा और सार्वजनिक बहस के स्तर पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राजनीतिक विरोधियों को अलग-अलग लेबल से संबोधित करने से संवाद का स्तर नीचे जाता है।
दूसरी ओर, सरकार और बीजेपी की ओर से इस मुद्दे पर अलग रुख सामने आया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी को विपक्ष के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। ऐसे में अब कांग्रेस और सरकार के बीच इस बयान के अर्थ और संदर्भ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब संसद और राजनीतिक मंचों पर सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर तीखी बहस चल रही है। ऐसे में ‘दिमागी नक्सल’ वाला बयान भी राजनीतिक टकराव का नया मुद्दा बन गया है।
अब देखना होगा कि सरकार की ओर से चिदंबरम के सवाल का कोई स्पष्ट जवाब आता है या नहीं। फिलहाल एक तरफ कांग्रेस प्रधानमंत्री की टिप्पणी को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं सरकार इसे विपक्ष पर निशाना नहीं मान रही है।
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