दिल्ली में संगठित अपराध और जेलों के भीतर से संचालित होने वाले आपराधिक नेटवर्क पर शिकंजा कसने की तैयारी है। दिल्ली सरकार ने हाई-रिस्क कैदियों और गैंगस्टरों को जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों की जेलों में ट्रांसफर करने की दिशा में बड़ा प्रस्ताव रखा है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य राजधानी की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, जेलों के अंदर होने वाली गैंगवार की घटनाओं पर रोक लगाना और जेल से संचालित होने वाले आपराधिक नेटवर्क को कमजोर करना बताया जा रहा है।
प्रस्ताव के तहत दिल्ली की जेलों में बंद ऐसे विचाराधीन गैंगस्टर, संगठित अपराधी और अन्य हाई-रिस्क कैदी, जिन्हें जेल की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाता है, उन्हें दूसरे राज्यों की जेलों में स्थानांतरित किया जा सकेगा।
दिल्ली सरकार ने इसके लिए Transfer of Prisoners (Punjab Amendment) Act, 2025 को लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद दिल्ली की जेल प्रशासन को ऐसे कैदियों के ट्रांसफर के लिए एक अतिरिक्त कानूनी रास्ता मिल सकता है।
सरकार का मानना है कि कुछ बड़े आपराधिक नेटवर्क जेल के अंदर रहने के बावजूद बाहर की गतिविधियों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में हाई-रिस्क कैदियों को दिल्ली से दूर दूसरी जेलों में भेजने से उनके संपर्क और नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिल सकती है।
जेलों के अंदर गैंगस्टरों के बीच टकराव भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती रहा है। अलग-अलग गैंग से जुड़े कैदियों को एक ही जेल व्यवस्था में रखने से तनाव और गैंगवार की आशंका बढ़ सकती है। ऐसे में संवेदनशील कैदियों को अलग-अलग राज्यों की जेलों में स्थानांतरित करने का विकल्प सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
इस प्रस्ताव का एक अहम पहलू यह भी है कि हाई-रिस्क कैदियों की गतिविधियों और उनके संपर्कों पर ज्यादा प्रभावी निगरानी की जा सके। दूसरे राज्य की जेल में स्थानांतरण होने पर उनके पुराने स्थानीय नेटवर्क से संपर्क प्रभावित होने की संभावना रहती है।
हालांकि, किसी भी कैदी का ट्रांसफर तय प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों के तहत ही किया जाएगा। खासतौर पर विचाराधीन कैदियों के मामलों में अदालत से जुड़े अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होगा।
दिल्ली सरकार की इस पहल को राजधानी में संगठित अपराध के खिलाफ व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसका उद्देश्य सिर्फ जेलों के भीतर सुरक्षा बढ़ाना नहीं, बल्कि उन आपराधिक नेटवर्क पर भी दबाव बनाना है जो जेल के अंदर से बाहर तक अपनी गतिविधियां संचालित करने की कोशिश करते हैं।
अब देखना होगा कि इस प्रस्ताव को लागू करने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है और किन कैदियों को हाई-रिस्क श्रेणी में रखा जाता है। अगर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो दिल्ली की जेलों से संचालित होने वाले गैंग नेटवर्क पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।
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