दिल्ली में बढ़ती पानी की मांग और लगातार गहराते जल संकट के बीच सरकार अब पानी के दोबारा इस्तेमाल पर जोर देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए दिल्ली सरकार जल्द ही ‘Reclaim Water Policy 2026’ लाने की तैयारी में है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP से साफ किए गए पानी का ज्यादा से ज्यादा दोबारा इस्तेमाल करना है, ताकि पीने योग्य पानी की खपत को कम किया जा सके और उपलब्ध जल संसाधनों पर दबाव घटाया जा सके।
दिल्ली में आबादी बढ़ने के साथ पानी की मांग भी लगातार बढ़ रही है। गर्मियों के दौरान कई इलाकों में पानी की कमी की शिकायतें सामने आती हैं और ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमित जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है। नई नीति इसी समस्या का एक संभावित समाधान मानी जा रही है, जिसमें ऐसे कामों के लिए पीने योग्य पानी के इस्तेमाल को कम करने की कोशिश होगी, जहां साफ लेकिन गैर-पेयजल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
Reclaim Water Policy के तहत सीवेज को ट्रीट करके तैयार किए गए पानी को अलग-अलग गैर-घरेलू कामों में इस्तेमाल करने को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें कंस्ट्रक्शन से जुड़े काम, हॉर्टिकल्चर यानी पेड़-पौधों और बागवानी में पानी देना जैसे काम शामिल हो सकते हैं। इसका मतलब यह है कि जिन कामों के लिए पीने लायक पानी की जरूरत नहीं होती, वहां ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।
कंस्ट्रक्शन सेक्टर में पानी की काफी जरूरत होती है। इमारतों और दूसरी परियोजनाओं के निर्माण के दौरान धूल नियंत्रण, निर्माण सामग्री से जुड़े कई काम और अन्य गतिविधियों में बड़ी मात्रा में पानी इस्तेमाल किया जाता है। अगर इन जरूरतों के लिए ट्रीटेड वेस्टवॉटर का इस्तेमाल बढ़ता है, तो पीने योग्य पानी को बचाया जा सकता है। इससे एक तरफ जल संसाधनों पर दबाव कम होगा, वहीं दूसरी तरफ सीवेज से तैयार पानी का उपयोगी इस्तेमाल भी संभव होगा।
इसी तरह दिल्ली के पार्कों, ग्रीन बेल्ट और दूसरी हरित जगहों में पौधों की सिंचाई के लिए भी बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। हॉर्टिकल्चर में ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल बढ़ाने से पीने योग्य पानी की बचत हो सकती है। इस तरह शहर में उपलब्ध पानी का इस्तेमाल उसकी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग क्षेत्रों में किया जा सकेगा।
इस नीति का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पानी को सिर्फ इस्तेमाल करने के बजाय उसे दोबारा उपयोग करने की व्यवस्था को मजबूत करना है। यानी घरों और दूसरे स्रोतों से निकलने वाले सीवेज को ट्रीट करके उसे दोबारा उपयोग में लाया जाए। इससे पानी की एक ऐसी सर्कुलर व्यवस्था तैयार करने में मदद मिल सकती है, जिसमें इस्तेमाल किए गए पानी का उपचार करके उसे फिर से गैर-पेयजल जरूरतों में इस्तेमाल किया जाए।
हालांकि इस नीति को सफल बनाने के लिए सिर्फ नियम बनाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए दिल्ली में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता, ट्रीटेड पानी की गुणवत्ता और उसे इस्तेमाल करने के लिए जरूरी पाइपलाइन नेटवर्क को भी मजबूत करना होगा। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि ट्रीटेड पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो और जहां इस्तेमाल किया जा रहा है, वहां लोगों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
सरकार के सामने एक और चुनौती लोगों और संस्थानों को ट्रीटेड पानी के इस्तेमाल के लिए तैयार करने की होगी। कई बार साफ किए गए पानी को लेकर लोगों में स्वाभाविक झिझक होती है। ऐसे में जागरूकता और स्पष्ट नियमों के जरिए यह समझाना जरूरी होगा कि ट्रीटेड पानी किन कामों के लिए सुरक्षित और उपयुक्त है।
अगर Reclaim Water Policy 2026 को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो दिल्ली में पीने योग्य पानी की मांग को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। खासकर कंस्ट्रक्शन और हॉर्टिकल्चर जैसे क्षेत्रों में ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल बढ़ने से साफ पानी को जरूरी घरेलू और पेयजल जरूरतों के लिए बचाया जा सकेगा।
फिलहाल दिल्ली सरकार इस नीति को तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में इसके नियम, ट्रीटेड पानी की गुणवत्ता, इस्तेमाल के क्षेत्र और इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर ज्यादा जानकारी सामने आ सकती है। अगर योजना जमीन पर सही तरीके से लागू होती है, तो यह दिल्ली के बढ़ते जल संकट से निपटने और पानी की हर बूंद का बेहतर इस्तेमाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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