भारतीय महिला हॉकी टीम ने विश्व कप में ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। टीम ने अपने से ऊंची रैंकिंग वाली जर्मनी को 3-1 से हराकर विश्व कप में पांचवां स्थान हासिल किया। यह 1974 के बाद विश्व कप में भारतीय महिला हॉकी टीम का सबसे शानदार प्रदर्शन है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे सिर्फ मैदान पर खिलाड़ियों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि टीम के भीतर बदला हुआ माहौल और मजबूत टीम स्पिरिट भी बड़ी वजह बनकर सामने आई है।
दिग्गज गोलकीपर सविता पूनिया ने टीम के इस बदलाव को लेकर खुलकर बात की है। लंबे समय से भारतीय महिला हॉकी का हिस्सा रहीं सविता ने बताया कि टीम के अंदर अब पहले की तुलना में काफी सकारात्मक माहौल है। खिलाड़ियों के बीच खुलकर बातचीत होती है और हर खिलाड़ी अपने मन की बात टीम के दूसरे सदस्यों के साथ साझा कर सकती है।
सविता के मुताबिक, नए कोचिंग स्टाफ के आने के बाद टीम के माहौल में बड़ा बदलाव देखने को मिला। खिलाड़ियों को मैदान के बाहर भी एक-दूसरे के साथ समय बिताने, हंसने-बोलने और खुलकर बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उनका कहना है कि पहले कई बातें खिलाड़ी अपने मन में ही रख लेते थे, लेकिन अब टीम के अंदर संवाद काफी बेहतर हुआ है।
सविता ने कहा कि कोचिंग स्टाफ ने ऐसा वातावरण बनाया है, जिससे खिलाड़ियों के अंदर कुछ कर दिखाने की भावना पैदा हुई है। यह भावना सिर्फ बातचीत में नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की आंखों, अभ्यास और मैदान पर उनके प्रदर्शन में भी दिखाई देती है।
भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। टीम पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई थी और पिछले साल प्रो लीग से भी बाहर हो गई थी। इसके बाद टीम ने वापसी की और इस साल विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने के साथ एफआईएच नेशंस कप भी जीता। इसके जरिए टीम ने प्रो लीग में फिर जगह बनाई और अब विश्व कप में पांचवें स्थान पर पहुंचकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
विश्व कप में भारत को सिर्फ नीदरलैंड्स के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे दौर का मुकाबला गोलरहित ड्रॉ रहने के कारण भारतीय टीम सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गई। इस मुकाबले के बाद सविता की भावुक तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं।
सविता ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले के बाद वह काफी निराश थीं। उन्हें लगा कि अगर टीम ने जर्मनी के खिलाफ दिखाए गए खेल का आधा भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिखाया होता, तो शायद भारत सेमीफाइनल में पहुंच सकता था। इस निराशा के कारण उनकी आंखों में आंसू आ गए थे।
लेकिन टीम ने उस मुश्किल वक्त में अपनी अनुभवी गोलकीपर का साथ नहीं छोड़ा। सविता के मुताबिक, उन्हें संभलने में करीब दो घंटे लगे, लेकिन इसके बाद पूरी टीम साथ बैठी और आगे की रणनीति पर बात की। खिलाड़ियों ने तय किया कि अब खोने के लिए कुछ नहीं है और पांचवें स्थान के मुकाबले में अपनी पूरी ताकत लगानी है।
इसके बाद भारतीय टीम ने जर्मनी के खिलाफ शानदार हॉकी खेली और 3-1 से जीत हासिल की। इस जीत ने टीम को विश्व कप में पांचवें स्थान पर पहुंचा दिया। सविता के लिए यह जीत भावुक भी थी, क्योंकि कुछ दिन पहले वह निराशा में रो रही थीं और अब उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे।
सविता का मानना है कि भारतीय महिला हॉकी सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक का भी जिक्र किया, जहां भारतीय टीम पदक के बेहद करीब पहुंचकर चूक गई थी। उनके मुताबिक, इन झटकों के बावजूद टीम ने हार नहीं मानी और लगातार वापसी करने की कोशिश की।
अब भारतीय टीम की नजर एशियाई खेलों पर है। सविता का लक्ष्य साफ है कि टीम वहां स्वर्ण पदक जीते और लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करे। उनका कहना है कि टीम की आक्रामक हॉकी उसकी बड़ी ताकत है और आने वाले मुकाबलों में भी खिलाड़ियों को इसी आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरना होगा।
सविता ने यह भी बताया कि भारतीय टीम अब विरोधी टीम को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचने के बजाय अपनी हॉकी पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उनका मानना है कि मैच दर मैच रणनीति बनाना, अनुशासन बनाए रखना और परिणाम की चिंता किए बिना अपने खेल पर ध्यान देना टीम की सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
इस विश्व कप में कई युवा खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। सविता के मुताबिक, 11 खिलाड़ियों के लिए यह पहला विश्व कप था और उन्होंने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। इससे भारतीय महिला हॉकी के भविष्य को लेकर उनका भरोसा और मजबूत हुआ है।
इसी वजह से सविता महिला हॉकी लीग को भी बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। उनका कहना है कि भारत में जमीनी स्तर पर प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। अगर उन्हें नियमित रूप से उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा मिलेगी तो वे आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
भारतीय टीम की अनुभवी फॉरवर्ड नवनीत कौर ने भी इसी बात पर जोर दिया। जर्मनी के खिलाफ दो गोल करने वाली नवनीत ने कहा कि खिलाड़ी सिर्फ अपने परिवार और देश के लिए नहीं, बल्कि भारतीय महिला हॉकी के भविष्य के लिए भी खेल रही हैं।
नवनीत के मुताबिक, विश्व कप में मिली सफलता ने खिलाड़ियों का आत्मविश्वास काफी बढ़ाया है। अब टीम को भरोसा है कि वह किसी भी मजबूत टीम को हरा सकती है। यही आत्मविश्वास आने वाले एशियाई खेलों और ओलंपिक क्वालीफिकेशन की राह में भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए बड़ी ताकत बन सकता है।
यानी 1974 के बाद विश्व कप में पांचवां स्थान हासिल करना सिर्फ एक पदक तालिका का आंकड़ा नहीं है। यह भारतीय महिला हॉकी में आए बदलाव, खिलाड़ियों के बीच बढ़े भरोसे और मजबूत टीम स्पिरिट का परिणाम भी है। सविता पूनिया के शब्दों में कहें तो टीम ने मुश्किल दौर से निकलना सीख लिया है और अब उसकी नजर सिर्फ आगे बढ़ने पर है।
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