दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले 45 दिनों के आंदोलन को लेकर सोनम वांगचुक ने बड़ा दावा किया है। आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे वांगचुक ने आरोप लगाया कि जैसे-जैसे प्रदर्शन में लोगों की संख्या कम होने लगी, वैसे-वैसे आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं का उत्साह भी कमजोर पड़ने लगा था।
सोनम वांगचुक ने दावा किया कि CJP के कुछ नेता आंदोलन को लंबे समय तक जारी रखने के पक्ष में नहीं थे। उनके मुताबिक, कई मौकों पर नेताओं ने उनसे आंदोलन खत्म करने की अपील भी की थी। वांगचुक का यह बयान आंदोलन के भीतर की रणनीति और मतभेदों को लेकर नई चर्चा शुरू कर सकता है।
जंतर-मंतर पर यह आंदोलन करीब 45 दिनों तक चला था। इस दौरान सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक आमरण अनशन किया था। उनके अनशन को आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना गया और इसी वजह से वह प्रदर्शन का प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए।
वांगचुक के मुताबिक, आंदोलन के शुरुआती दौर में बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन से जुड़े थे। भीड़ और समर्थन को देखते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाने का उत्साह भी काफी ज्यादा था। लेकिन समय बीतने के साथ प्रदर्शन में लोगों की संख्या कम होने लगी और इसके साथ ही आंदोलन को जारी रखने को लेकर कुछ नेताओं की राय बदलने लगी।
उन्होंने दावा किया कि CJP के कुछ नेता कई बार उनके सामने हाथ जोड़कर आंदोलन समाप्त करने की बात कह चुके थे। हालांकि वांगचुक का कहना है कि वह आंदोलन को उसके उद्देश्य तक पहुंचाए बिना खत्म करने के पक्ष में नहीं थे।
उनके इस बयान के बाद अब आंदोलन की अंदरूनी रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि आंदोलन के बीच कुछ नेता इसे आगे बढ़ाने से पीछे हटने लगे? क्या घटती भीड़ इसकी मुख्य वजह थी या इसके पीछे कोई और रणनीतिक कारण था? इन सवालों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो सकती हैं।
सोनम वांगचुक ने अपने 26 दिन के आमरण अनशन के दौरान भी आंदोलन के मुद्दों को लगातार उठाया था। लंबे समय तक बिना भोजन अनशन पर रहना उनके लिए भी बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने आंदोलन को लेकर अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी।
जंतर-मंतर पर चले इस आंदोलन ने दिल्ली की राजनीति में भी काफी ध्यान आकर्षित किया था। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अलग-अलग मांगों को लेकर आवाज उठाई और आंदोलन को समर्थन दिया।
वांगचुक के ताजा दावे ने अब उस आंदोलन के दौरान लिए गए फैसलों और नेतृत्व की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है। उनके मुताबिक, आंदोलन को आगे बढ़ाने को लेकर सभी नेताओं की सोच एक जैसी नहीं थी।
हालांकि, वांगचुक की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर CJP नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। उनकी ओर से अपना पक्ष रखे जाने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि आंदोलन के दौरान वास्तव में अंदरूनी स्तर पर क्या चर्चा हुई थी।
फिलहाल सोनम वांगचुक का बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। 45 दिनों तक चले आंदोलन और उनके 26 दिन के आमरण अनशन के बाद अब उनके इस खुलासे ने आंदोलन के भीतर की रणनीति और नेतृत्व को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
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