नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। अधिकारियों के मुताबिक, इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 939 हो गई है, जबकि 3,925 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
यह आपदा 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने के बाद भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ से शुरू हुई। बाढ़ का पानी तेजी से नीचे की ओर बहा और उत्तरी तथा मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को अपनी चपेट में ले लिया।
बाढ़ के तेज बहाव में बड़ी संख्या में घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए। कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। भोटेकोशी नदी का पानी अपने रास्ते में आने वाले इलाकों में तबाही मचाता हुआ आगे बढ़ा, जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए।
अधिकारियों के अनुसार, अब तक 10,451 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। इनमें स्थानीय लोगों के साथ-साथ भारत, अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन, स्पेन, जर्मनी, इटली, तुर्किये और कई अन्य देशों के पर्यटक भी शामिल हैं।
सबसे बड़ी चुनौती अब उन लोगों को खोजने की है, जो अभी भी लापता हैं। अधिकारियों के मुताबिक, विभिन्न जलविद्युत परियोजना स्थलों पर 639 श्रमिकों और कर्मचारियों की तलाश की जा रही है। इनमें से कई लोगों के सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है।
एक स्थान पर बचाव दलों को बंद सुरंग तक पहुंचने में मुश्किल हुई। रास्ता खोलने के लिए वहां नियंत्रित विस्फोट का सहारा लेना पड़ा। सुरंगों में पानी और मलबा भरा होने के कारण रेस्क्यू टीमों के लिए अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
इस मुश्किल अभियान में भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी नेपाल की मदद कर रही हैं। भारत की ओर से डीएनए विश्लेषण में विशेषज्ञता रखने वाले 18 फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम नेपाल में मौजूद है। यह टीम मृतकों की पहचान करने में नेपाली अधिकारियों की सहायता कर रही है।
नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अतिरिक्त तकनीकी सहायता और जरूरी उपकरणों की मांग की है। अमेरिका से फ्रीजर, डीएनए जांच किट और लाइडार जैसे उपकरण मांगे गए हैं। इसके अलावा सिंगापुर से आपदा पीड़ितों की पहचान से जुड़ी सामग्री और चीन तथा सिंगापुर से बेल्ली पुल और अधिक क्षमता वाले ड्रोन की मांग की गई है।
बाढ़ के बाद अस्पतालों में अपने लापता परिजनों की तलाश करने वाले लोगों की भीड़ लगी हुई है। अस्पतालों की दीवारों पर लापता लोगों की तस्वीरें लगाई गई हैं, जिन्हें देखकर परिवार अपने रिश्तेदारों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि शवों की पहचान करना भी बड़ी चुनौती बन गया है। लंबे समय तक बाढ़ के पानी में रहने के कारण कई शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक बरामद सैकड़ों शवों में से केवल कुछ दर्जन की ही पहचान हो सकी है।
नेपाल में अभी भी लापता लोगों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 39 देशों के 590 विदेशी नागरिक लापता लोगों की सूची में हैं। इनमें 83 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में 275 से अधिक भारतीय और भारतीय मूल के 128 लोग अब भी लापता हैं।
बचाव अभियान के लिए नेपाल सरकार ने 21 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। फंसे लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर लगातार उड़ान भर रहे हैं। खराब मौसम, उफनती नदियों और क्षतिग्रस्त सड़कों के बावजूद राहत अभियान जारी है।
बाढ़ में 19 सड़क पुल और कई प्रमुख सड़कें बह गई हैं। नेपाल और चीन के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण रसुवागढ़ी सीमा मार्ग भी प्रभावित हुआ है। इससे राहत अभियान के साथ-साथ दोनों देशों के बीच जमीनी व्यापार और आवाजाही पर भी असर पड़ा है।
गोरखा जिले में भूस्खलन के कारण बूढ़ी गंडकी नदी का बहाव कुछ समय के लिए रुक गया था। बाद में पानी का प्रवाह दोबारा शुरू हो गया। वहीं रसुवा से बचाए गए घायल लोगों का काठमांडू में इलाज जारी है।
इस प्राकृतिक आपदा के बीच नेपाल को एक और चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर बाढ़ से जुड़े फर्जी और एआई से बनाए गए वीडियो और तस्वीरें तेजी से फैल रही हैं। सरकार ने गलत और अनुचित सामग्री को हटाने के लिए कई यूजर्स को आदेश जारी किए हैं।
नेपाल प्रेस काउंसिल ने भी आपदा से जुड़ी गलत सूचनाओं और आपत्तिजनक सामग्री की शिकायत के लिए विशेष पोर्टल शुरू किया है। सरकार का कहना है कि राहत और बचाव अभियान के बीच गलत जानकारी फैलने से लोगों में भ्रम और घबराहट पैदा हो सकती है।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। हजारों सुरक्षाकर्मी, स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि सुरंगों और बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
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