राजधानी दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। दुनिया के कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शीर्ष नेताओं की मौजूदगी वाले इस हाई-प्रोफाइल आयोजन को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। इसी कड़ी में देश की प्रमुख आतंकवाद-रोधी कमांडो फोर्स National Security Guard यानी NSG ने दिल्ली में बड़े स्तर पर सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी मेगा मॉक ड्रिल की। इस विशेष अभियान को ‘ऑपरेशन ब्रिक्स कवच’ नाम दिया गया है।
BRICS सम्मेलन के दौरान किसी भी संभावित आतंकी हमले, बंधक संकट या आपात स्थिति से निपटने के लिए NSG कमांडो ने अलग-अलग परिस्थितियों का अभ्यास किया। इस ड्रिल का उद्देश्य सुरक्षा बलों की तैयारियों को परखना और किसी भी चुनौती की स्थिति में कम से कम समय में कार्रवाई सुनिश्चित करना है। अभ्यास के दौरान कमांडो ने आतंकवादियों से निपटने, बंधकों को सुरक्षित बाहर निकालने और संवेदनशील स्थानों पर त्वरित कार्रवाई जैसी परिस्थितियों का अभ्यास किया।
‘ऑपरेशन ब्रिक्स कवच’ के तहत दिल्ली की चार अहम जगहों पर यह मॉक ड्रिल आयोजित की गई। करीब 100 NSG कमांडो इस अभ्यास में शामिल रहे। ड्रिल के दौरान कमांडोज ने अलग-अलग तरह के खतरे की स्थिति में अपनी रणनीति और ऑपरेशनल क्षमता का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की तैयारियों को भी परखा गया।
इस मेगा ड्रिल में दिल्ली पुलिस की SWAT टीम ने भी हिस्सा लिया। NSG और दिल्ली पुलिस के विशेष कमांडो दस्तों ने संयुक्त रूप से यह अभ्यास किया, ताकि वास्तविक खतरे की स्थिति में अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर Coordination सुनिश्चित किया जा सके। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इतने बड़े आयोजन में सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल एक एजेंसी तक सीमित नहीं होती, बल्कि कई सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम करती हैं। ऐसे में इस तरह की संयुक्त ड्रिल को काफी अहम माना जा रहा है।
BRICS सम्मेलन में कई देशों के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों के दिल्ली पहुंचने की संभावना है। भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होने वाले सम्मेलन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को पहले ही मजबूत किया जा रहा है। आयोजन स्थल के साथ-साथ महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों, प्रमुख मार्गों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
NSG की यह ड्रिल ऐसे समय में हुई है जब सम्मेलन के दौरान सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ी जा रही है। मॉक ड्रिल का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि सुरक्षा बल वास्तविक घटना के बिना ही संभावित परिस्थितियों का अभ्यास कर सकते हैं। इससे कमांडो और अन्य सुरक्षाकर्मियों को अचानक सामने आने वाली चुनौती के दौरान किस तरह प्रतिक्रिया देनी है, इसका अनुभव मिलता है।
‘ब्रिक्स कवच’ के दौरान आतंकवादी हमले और बंधक संकट जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर अभ्यास किया गया। इसके अलावा Rescue Operation और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई की क्षमता को भी परखा गया। इस तरह की ड्रिल के जरिए सुरक्षा बल अपनी तैयारी में मौजूद संभावित कमियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर कर सकते हैं।
BRICS सम्मेलन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन है और इसकी मेजबानी को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। NSG की मेगा ड्रिल इसी व्यापक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। सम्मेलन से पहले सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। ‘ऑपरेशन ब्रिक्स कवच’ के जरिए संदेश साफ है कि हाई-प्रोफाइल सम्मेलन के दौरान सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
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