Wednesday, September 23, 2026
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Insomnia से परेशान हैं? अपनाएं Military Method, 120 सेकंड में नींद लाने की कोशिश

रात में बिस्तर पर जाने के बाद भी अगर काफी देर तक नींद नहीं आती, तो यह समस्या धीरे-धीरे तनाव और थकान को बढ़ा सकती है। आज के समय में देर रात तक मोबाइल की स्क्रीन देखना, काम का दबाव, चिंता और अनियमित दिनचर्या जैसी वजहों से कई लोग अनिद्रा यानी इंसोम्निया की शिकायत करते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर चर्चित ‘मिलिट्री मेथड’ को जल्दी रिलैक्स होने और नींद के लिए अपनाया जाता है। हालांकि, इसे 120 सेकंड में हर व्यक्ति को निश्चित रूप से नींद दिलाने वाली तकनीक मानना सही नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य शरीर और दिमाग को धीरे-धीरे तनावमुक्त करना है।

मिलिट्री मेथड के बारे में दावा किया जाता है कि इसका इस्तेमाल सैनिकों को तनावपूर्ण परिस्थितियों में आराम करने और सोने में मदद करने के लिए किया गया था। इस तकनीक में शरीर के अलग-अलग हिस्सों को क्रम से ढीला छोड़ा जाता है और सांसों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इससे व्यक्ति का ध्यान आसपास की चिंताओं से हटकर शरीर और सांसों पर आ सकता है। नियमित अभ्यास के जरिए कुछ लोगों को सोने से पहले शांत होने में मदद मिल सकती है।

इस तकनीक की तुलना अक्सर भारतीय योग की शवासन मुद्रा से भी की जाती है। शवासन में शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़कर आराम की स्थिति में रखा जाता है और सांसों पर ध्यान दिया जाता है। मिलिट्री मेथड में भी शरीर के अलग-अलग हिस्सों को तनावमुक्त करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। दोनों का उद्देश्य शरीर को आराम देना और मानसिक तनाव कम करना है, हालांकि दोनों बिल्कुल एक जैसी तकनीकें नहीं हैं।

इसे आजमाने के लिए सबसे पहले आराम से बिस्तर पर लेट जाएं और आंखें बंद कर लें। कुछ गहरी और धीमी सांसें लें। अब अपने चेहरे पर ध्यान केंद्रित करें। माथे, आंखों के आसपास की मांसपेशियों, गाल, जबड़े और जीभ को जानबूझकर ढीला छोड़ें। चेहरे पर किसी तरह का तनाव महसूस हो तो उसे कम करने की कोशिश करें।

इसके बाद अपने कंधों पर ध्यान दें। दोनों कंधों को नीचे की ओर ढीला छोड़ दें। फिर एक-एक करके बाजुओं, कोहनियों, कलाइयों और हथेलियों को आराम दें। कोशिश करें कि शरीर का कोई हिस्सा अनावश्यक रूप से तनाव में न रहे।

अब अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। धीरे-धीरे सांस अंदर लें और आराम से बाहर छोड़ें। सांस को जबरदस्ती नियंत्रित करने की जरूरत नहीं है। केवल उसकी गति को महसूस करें और अपना ध्यान दूसरी चिंताओं से हटाने की कोशिश करें। इसके बाद छाती और पेट की मांसपेशियों को भी ढीला छोड़ दें।

अंत में पैरों पर ध्यान दें। जांघों, घुटनों, पिंडलियों, टखनों और पंजों को क्रम से आराम दें। पूरे शरीर को ऐसा महसूस करें जैसे वह बिस्तर पर पूरी तरह ढीला पड़ा हुआ है। इस दौरान मोबाइल देखने या बार-बार समय जांचने से बचना बेहतर है, क्योंकि इससे दिमाग फिर से सक्रिय हो सकता है।

ध्यान रखें कि 120 सेकंड में नींद आना कोई वैज्ञानिक रूप से गारंटी किया गया परिणाम नहीं है। अगर कभी-कभी नींद आने में परेशानी होती है, तो ऐसी रिलैक्सेशन तकनीकें मददगार हो सकती हैं। लेकिन अगर कई हफ्तों से लगातार नींद खराब है, दिन में अत्यधिक नींद आती है, खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसी समस्या होती है या अनिद्रा रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित कर रही है, तो डॉक्टर या नींद विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। अच्छी नींद के लिए नियमित सोने-जागने का समय, रात में स्क्रीन का कम इस्तेमाल, कैफीन से सावधानी और शांत सोने का वातावरण भी महत्वपूर्ण है।

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