लियोनेल मेस्सी ने अर्जेंटीना की जर्सी में अपने 21 साल लंबे शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर को भावुक विदाई दे दी। 39 वर्षीय मेस्सी ने अपने विदाई मुकाबले में बेनिन के खिलाफ गोल दागा और टीम को 3-0 की जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। मैच खत्म होने के बाद जब उनके साथी खिलाड़ी उन्हें घेरकर खड़े हुए और स्टेडियम में हजारों प्रशंसकों ने मेस्सी-मेस्सी के नारे लगाए, तो महान फुटबॉलर की आंखें नम हो गईं। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की विदाई नहीं थी, बल्कि अर्जेंटीना फुटबॉल के एक ऐसे दौर का अंत था, जिसे दुनिया लंबे समय तक याद रखेगी।
मेस्सी ने अर्जेंटीना के लिए दो दशक से ज्यादा समय तक खेलते हुए 126 अंतरराष्ट्रीय गोल किए और टीम को दो कोपा अमेरिका खिताब तथा एक विश्व कप जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बेनिन के खिलाफ उनका आखिरी मुकाबला भले ही एक दोस्ताना मैच था, लेकिन अर्जेंटीना के प्रशंसकों के लिए यह किसी बड़े फाइनल से कम नहीं था। मेस्सी ने पेनल्टी पर गोल किया और टीम के बाकी दो गोल में भी योगदान दिया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय टीम के साथ अपने शानदार सफर को यादगार अंदाज में समाप्त किया।
अर्जेंटीना के लोगों का मेस्सी के साथ रिश्ता बेहद खास रहा है। 13 साल की उम्र में रोसारियो छोड़कर स्पेन के बार्सिलोना की युवा अकादमी में जाने वाले इस खिलाड़ी ने धीरे-धीरे दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल सितारों में अपनी जगह बनाई। हालांकि, शुरुआती वर्षों में अर्जेंटीना में उनके प्रति उम्मीदों का दबाव काफी ज्यादा था। कुछ प्रशंसक उनकी राष्ट्रीय टीम के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल भी उठाते थे। खासकर अर्जेंटीना के महान खिलाड़ी डिएगो माराडोना से लगातार तुलना के कारण मेस्सी पर देश के लिए बड़ा खिताब जीतने का दबाव बना रहा।
2016 में अर्जेंटीना के लगातार तीसरे बड़े फाइनल में हारने के बाद मेस्सी ने कुछ समय के लिए राष्ट्रीय टीम से दूर रहने का फैसला भी किया था। लेकिन 2021 में कहानी बदल गई। अर्जेंटीना ने ब्राजील को हराकर कोपा अमेरिका का खिताब जीता और 28 साल के इंतजार को खत्म किया। उस जीत के बाद मेस्सी और अर्जेंटीना के बीच का रिश्ता एक नए मुकाम पर पहुंचा। इसके अगले साल कतर में हुए विश्व कप में अर्जेंटीना की ऐतिहासिक जीत ने मेस्सी को अपने देश के सबसे बड़े फुटबॉल नायकों में शामिल कर दिया।
विश्व कप जीत मेस्सी के करियर का वह अध्याय था, जो लंबे समय से अधूरा माना जाता था। विश्व कप ट्रॉफी उठाने के बाद अर्जेंटीना की सड़कों पर लाखों लोग जश्न मनाने के लिए उतर आए। हर तरफ मेस्सी के नाम और उनकी 10 नंबर की जर्सी की चर्चा थी। जिस खिलाड़ी से कभी राष्ट्रीय टीम के लिए बड़ी ट्रॉफी नहीं जीत पाने को लेकर सवाल पूछे जाते थे, वही खिलाड़ी अब अर्जेंटीना के फुटबॉल इतिहास का सबसे भावुक और महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका था।
मेस्सी की विदाई को अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ ने भी खास बनाने की पूरी कोशिश की। उनके आखिरी मैच को ‘द लास्ट टैंगो’ नाम दिया गया। ब्यूनस आयर्स के विशाल स्टेडियम में 85 हजार से ज्यादा टिकट बेहद कम समय में बिक गए। अर्जेंटीना की 1978, 1986 और 2022 की विश्व कप विजेता टीमों के कई खिलाड़ी भी उन्हें विदाई देने पहुंचे। स्टेडियम में लगातार ‘ओले, ओले, ओले, मेस्सी, मेस्सी’ के नारे गूंजते रहे।
मैच के बाद मेस्सी ने प्रशंसकों को भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वह वहां से जाना नहीं चाहते और अर्जेंटीना के लोगों से प्यार करते हैं। उन्होंने इस बात के लिए भी आभार जताया कि उन्हें अर्जेंटीना का होने और देश के लिए खेलने का मौका मिला। मैदान पर उनके साथी खिलाड़ियों ने उन्हें घेरकर तालियां बजाईं, जबकि स्टैंड में मौजूद हजारों प्रशंसक इस ऐतिहासिक पल को अपनी आंखों के सामने देख रहे थे।
मेस्सी की विदाई का असर पूरे अर्जेंटीना में दिखाई दिया। देशभर में उनके सम्मान में बने म्यूरल चर्चा में रहे। ब्यूनस आयर्स का प्रसिद्ध ओबेलिस्क भी अर्जेंटीना के राष्ट्रीय ध्वज के आसमानी और सफेद रंग से रोशन किया गया। पैटागोनिया में विश्व कप ट्रॉफी के साथ मेस्सी की विशाल प्रतिमा भी उनके सम्मान का प्रतीक बनी हुई है। हालांकि मेस्सी क्लब फुटबॉल में अपना सफर जारी रखेंगे, लेकिन अर्जेंटीना की जर्सी में उनका 21 साल का अध्याय अब समाप्त हो गया है। उनकी विदाई के साथ अर्जेंटीना फुटबॉल का एक ऐसा स्वर्णिम दौर खत्म हुआ है, जिसकी यादें आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा खास रहेंगी।
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