उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया की तस्वीर अब लगभग पूरी तरह साफ हो गई है। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे खारिज कर दिए गए हैं। इसके बाद मैदान में भारतीय जनता पार्टी के 8 और समाजवादी पार्टी के 2 उम्मीदवार ही रह गए हैं। यानी कुल 10 सीटों के लिए अब 10 ही उम्मीदवार मैदान में हैं। ऐसे में अगर नाम वापसी की अंतिम तारीख तक स्थिति में कोई बदलाव नहीं होता है, तो इन सभी का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर थी। चुनावी प्रक्रिया के तहत कुल 12 उम्मीदवारों ने नामांकन किया था। इनमें बीजेपी के 8, सपा के 2 और दो निर्दलीय उम्मीदवार शामिल थे। इसके बाद 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच की गई, जिसमें निर्दलीय प्रत्याशियों ओंकारनाथ चौरसिया और कांते सायना के नामांकन में जरूरी प्रस्तावक संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं पाई गईं। इसी आधार पर दोनों के पर्चे निरस्त कर दिए गए।
नामांकन खारिज होने के बाद अब चुनावी मुकाबले की संभावना खत्म होती दिखाई दे रही है। क्योंकि राज्यसभा की 10 सीटों के लिए बीजेपी ने 8 उम्मीदवार और सपा ने 2 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। कुल उम्मीदवारों की संख्या अब सीटों की संख्या के बराबर हो गई है। ऐसे में मतदान कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बशर्ते नाम वापसी की प्रक्रिया के दौरान कोई उम्मीदवार अपना नाम वापस न ले या कोई अन्य बदलाव सामने न आए।
बीजेपी की ओर से उत्तर प्रदेश की इन सीटों के लिए धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी के सभी आठ प्रत्याशियों ने 6 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया था।
वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से रामगोपाल यादव और धनराज नाथवानी उम्मीदवार हैं। सपा ने तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है। ऐसे में बीजेपी के 8 और सपा के 2 उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति पहले ही बन गई थी, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन के कारण औपचारिक तस्वीर नामांकन पत्रों की जांच के बाद ही साफ होनी थी। अब दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे खारिज होने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो गई है।
राज्यसभा चुनाव के कार्यक्रम के मुताबिक नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर है। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। वहीं, मतदान की निर्धारित तारीख 16 अक्टूबर है, लेकिन मौजूदा स्थिति में मतदान की जरूरत नहीं पड़ने की संभावना है।
इस घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व भी काफी बड़ा है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए संभावित मुकाबले को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक चर्चाएं चल रही थीं। खासकर निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन और सपा की ओर से तीसरा प्रत्याशी उतारे जाने की संभावनाओं को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं। अब दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन खारिज होने और सपा के तीसरे उम्मीदवार को मैदान में न उतारने के बाद चुनावी गणित काफी हद तक स्पष्ट हो गया है।
हालांकि, अभी 9 अक्टूबर को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। इसके बाद ही निर्विरोध निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा होगी। फिलहाल मौजूदा स्थिति के अनुसार उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर बीजेपी के 8 और सपा के 2 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ दिखाई दे रहा है।
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