एशियाई खेलों में जगह नहीं मिली, लेकिन लक्ष्य अभी खत्म नहीं हुआ है। भारत के अनुभवी कंपाउंड तीरंदाज अभिषेक वर्मा अब अपनी निगाहें 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक पर लगाए हुए हैं। एशियाई खेलों में लगातार चौथी बार हिस्सा लेने से चूकने के बावजूद उनका हौसला बरकरार है। खास बात यह है कि जिन युवा खिलाड़ियों को उन्होंने प्रशिक्षण दिया, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए शानदार प्रदर्शन किया। अब सवाल यह है कि क्या अभिषेक वर्मा अपने लंबे अनुभव और मेहनत के दम पर ओलंपिक में पदक जीतने का सपना पूरा कर पाएंगे?
भारत के दिग्गज कंपाउंड तीरंदाज अभिषेक वर्मा ने अपने खेल करियर में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। विश्व कप में खिताब जीतने से लेकर एशियाई खेलों में पदक हासिल करने तक, उन्होंने भारतीय तीरंदाजी को कई यादगार पल दिए हैं। लेकिन खेल के मैदान में उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद उनका लक्ष्य अभी पूरा नहीं हुआ है। अभिषेक अब 2028 में अमेरिका के लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों और भारत में 2030 में प्रस्तावित राष्ट्रमंडल खेलों को ध्यान में रखकर अपनी तैयारियों पर ध्यान देना चाहते हैं।
हाल ही में संपन्न हुए आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारतीय कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। साहिल जाधव और चिकिता तनिपार्थी ने मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत के लिए ओलंपिक कोटा हासिल किया। इस सफलता के साथ भारत कंपाउंड तीरंदाजी में ओलंपिक कोटा हासिल करने वाला पहला देश बना। यह भारतीय तीरंदाजी के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि कंपाउंड तीरंदाजी को 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक कार्यक्रम में शामिल किया गया है।
हालांकि, इस उपलब्धि के बीच अभिषेक वर्मा के लिए एशियाई खेलों में हिस्सा नहीं ले पाना निराशाजनक रहा। 37 वर्षीय तीरंदाज ने स्वीकार किया कि इतने बड़े प्रतियोगिता मंच से दूर रहना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि जिन खिलाड़ियों को उन्होंने प्रशिक्षण दिया था, वे प्रतियोगिता में मौजूद थे और उन्होंने वैसा ही प्रदर्शन किया, जिसकी उनसे उम्मीद की गई थी। युवा खिलाड़ियों की सफलता से उन्हें संतोष मिला और भारतीय टीम के प्रदर्शन ने उन्हें आगे की तैयारियों के लिए प्रेरित किया।
अभिषेक के सामने अब एक बड़ा लक्ष्य है। वह चाहते हैं कि भारत ओलंपिक में अपनी क्षमता के अनुसार प्रदर्शन करे और कंपाउंड तीरंदाजी में मिली नई संभावनाओं का पूरा लाभ उठाए। ओलंपिक कोटा हासिल होने के बाद खिलाड़ियों को क्वालिफिकेशन की चिंता से कुछ राहत मिलती है। हालांकि, कोटा हासिल होने का अर्थ यह नहीं है कि किसी विशेष खिलाड़ी की ओलंपिक में जगह अपने आप पक्की हो गई है। अंतिम चयन संबंधित नियमों और निर्धारित ट्रायल के आधार पर किया जाएगा।
अभिषेक वर्मा का मानना है कि ओलंपिक के लिए तैयारी का समय बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि क्वालिफिकेशन का दबाव कम होने के बाद खिलाड़ी अपना ध्यान प्रशिक्षण, तकनीक और प्रदर्शन में सुधार पर केंद्रित कर सकते हैं। उनके अनुसार, उपलब्ध समय का सही इस्तेमाल करना जरूरी होगा, ताकि भारतीय खिलाड़ी बड़े मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। ओलंपिक जैसी प्रतियोगिता में सफलता के लिए निरंतर अभ्यास, मानसिक तैयारी और दबाव में सही निशाना लगाना महत्वपूर्ण होता है।
अभिषेक का खेल करियर भी उनकी निरंतरता और अनुभव को दर्शाता है। वह तीन एशियाई खेलों में हिस्सा ले चुके हैं और दो स्वर्ण पदकों सहित कुल पांच पदक जीत चुके हैं। इसके अलावा, विश्व कप में भी उन्होंने कई खिताब अपने नाम किए हैं। इतने लंबे अनुभव के बाद भी वह अपने सफर को पूरा नहीं मानते। उनका कहना है कि इंसान जितनी अधिक उपलब्धियां हासिल करता है, उसकी आगे बढ़ने की इच्छा उतनी ही बढ़ती जाती है। यही सोच उन्हें अपने अगले लक्ष्य की ओर आगे बढ़ा रही है।
अब उनकी निगाहें 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक पर हैं। इसके साथ ही वह 2030 में भारत में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों को भी अपने लक्ष्यों में शामिल कर रहे हैं। इन प्रतियोगिताओं तक पहुंचने के लिए उन्हें अपनी फिटनेस, तकनीक और प्रतिस्पर्धात्मक प्रदर्शन को लगातार बेहतर बनाए रखना होगा। उम्र और अनुभव के साथ प्रशिक्षण की योजना भी महत्वपूर्ण हो जाती है, ताकि खिलाड़ी लंबे समय तक उच्च स्तर पर प्रदर्शन कर सके।
भारतीय तीरंदाजी के लिए भी आने वाले वर्ष अहम रहने वाले हैं। युवा खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन और अनुभवी खिलाड़ियों के मार्गदर्शन से टीम को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। साहिल जाधव और चिकिता तनिपार्थी की सफलता ने जहां भारतीय कंपाउंड तीरंदाजी के लिए नई उम्मीदें पैदा की हैं, वहीं अभिषेक वर्मा जैसे अनुभवी खिलाड़ी का ओलंपिक लक्ष्य यह दिखाता है कि खेल में आगे बढ़ने की इच्छा उपलब्धियों के बाद भी बनी रह सकती है।
फिलहाल, एशियाई खेलों में जगह नहीं मिलने की निराशा को पीछे छोड़कर अभिषेक वर्मा अपने अगले लक्ष्य की तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अब उनके सामने चुनौती अपने अनुभव को प्रदर्शन में बदलने और ओलंपिक के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की होगी। क्या अभिषेक वर्मा 2028 में अपने ओलंपिक सपने को साकार कर पाएंगे? इसका जवाब आने वाले समय में उनके प्रदर्शन और चयन प्रक्रिया से मिलेगा।
![]()

